जिले में 2021 से अब तक 25 हजार से अधिक नसबंदी के हुए सफल ऑपरेशन
नसबंदी के उपरांत गर्भवती होने पर 90 दिन में स्वास्थ्य विभाग को करें सूचित, 60 हजार की मिलेगी मदद

अलीगढ़ : जनपद में परिवार कल्याण कार्यक्रम शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं चिकित्सकीय मानकों के साथ संचालित किया जा रहा है। महिलाओं एवं पुरुषों के लिए उपलब्ध कराई जा रही नसबंदी सेवाओं में सुरक्षा, परामर्श और सहमति की प्रक्रिया को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे जनहित में प्रभावी परिणाम सामने आ रहे हैं।मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 नीरज त्यागी ने बताया कि नसबंदी से पूर्व प्रत्येक लाभार्थी को संभावित जटिलताओं, सावधानियों और उपचार संबंधी सभी पहलुओं की स्पष्ट जानकारी दी जाती है। लिखित सहमति के उपरांत ही ऑपरेशन किया जाता है, जिससे लाभार्थियों में जागरूकता और विश्वास बना रहता है। चिकित्सकीय दृष्टि से कुछ मामलों में ऑपरेशन के पश्चात प्राकृतिक कारणों से जटिलता उत्पन्न होने की संभावना रहती है, जिसे स्वास्थ्य विज्ञान में स्वाभाविक माना गया है। कुछ मामलों में महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब में नसबंदी ऑपरेशन के उपरांत सूजन आ जाती है, जिसके कारण नसबंदी असफल होने की संभावना बनी रहती है। चंूकि यह सूचन ऑपरेशन के बाद पैदा होती है, जिससे इसका पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं होता।उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में 2021 से 2025 तक जिले में लगभग 25 हजार नसबंदी ऑपरेशन किए गए, जिनमें मात्र 62 मामलों में ही असफलता दर्ज की गई। यह असफलता दर प्रदेश एवं राष्ट्रीय औसत के अनुरूप है, जो जिले की सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त सीएमओ द्वारा बताया गया कि नसबंदी के उपरांत गर्भवती होने की इसकी सूचना 90 दिन के भीतर स्वास्थ्य विभाग को दिए जाने का प्राविधान है। निर्धारित समयावधि में सूचना देने वाले पात्र लाभार्थियों को शासन द्वारा 60 हजार रूपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की सतत निगरानी, आंकड़ों का विश्लेषण तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम समय-समय पर उठाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त प्रयास है कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जाए और जनपद को स्वस्थ, सुरक्षित एवं जागरूक समाज की दिशा में निरंतर आगे बढ़ाया जाए।



