यूजीसी कानून के विरोध में मैथिल ब्राह्मण महासभा ने सौंपे ज्ञापन
वाहर लाल शर्मा एवं विजय कुमार शर्मा (विट्टू) ने कहा कि सीमित अवसरों में सामान्य वर्ग के मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय हो रहा

अलीगढ़।मैथिल ब्राह्मण महासभा, उत्तर प्रदेश द्वारा आज जिलाधिकारी कार्यालय, अलीगढ़ पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नवीन कानून/नियमों के विरोध में माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार एवं महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित दो ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी श्री संतोष गर्ग को सौंपे गए।इस अवसर पर महासभा के प्रतिनिधि वीरेंद्र शर्मा भैया ने कहा कि यूजीसी के नवीन नियम देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, योग्यता आधारित चयन प्रणाली तथा संविधान में निहित समान अवसर की भावना पर सीधा प्रहार हैं।सेवाराम शर्मा गुरुजी ने कहा कि ये नीतियाँ शिक्षा में उत्कृष्टता और शोध को मजबूत करने के बजाय मेधावी विद्यार्थियों, विशेषकर सामान्य वर्ग के छात्रों, के भविष्य को अंधकारमय बना रही हैं।महेंद्र पाल शास्त्री एवं राजकुमार शर्मा (राजू पंडित) ने चयन व नियुक्तियों में संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 की भावना के उल्लंघन का आरोप लगाया।
जवाहर लाल शर्मा एवं विजय कुमार शर्मा (विट्टू) ने कहा कि सीमित अवसरों में सामान्य वर्ग के मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय हो रहा है।प्रदीप शर्मा एवं लेखराज शर्मा (बॉबी) ने कहा कि योग्यता की अनदेखी से विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक साख को गंभीर क्षति पहुंचेगी। रामप्रकाश शर्मा एवं डॉ. वीरेंद्र शर्मा (बंटी) ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त होने पर चिंता जताई।विजय प्रकाश वत्स ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की आत्मा है और शिक्षा में अन्याय होने से देश का भविष्य प्रभावित होगा।महासभा ने मांग की कि यूजीसी के नवीन कानून/नियम तत्काल स्थगित किए जाएं, पुनरीक्षण समिति गठित की जाए तथा सामान्य वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के हितों की ठोस संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।इस अवसर पर वसंत कुमार शर्मा, एड. ओमप्रकाश शर्मा, रामगोपाल शर्मा, पूनम शर्मा, एड. अनुराग पाराशर, प्रभा शर्मा, एड. गोपाल मिश्रा, अजय कुमार शर्मा, अमन भारद्वाज, हरीश कुमार शर्मा वेद प्रकाश शर्मा राजेंद्र कुमार पाठक एवं सोनदेव शर्मा सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।



