हाथरस में नो एंट्री के नाम पर ट्रक चालक से ₹3000 सुविधा शुल्क मांगने का आरोप
मना करने पर ₹20 हजार का चालान

हाथरस में नो एंट्री व्यवस्था को लेकर ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ट्रक चालक ने ट्रैफिक कर्मियों पर ₹3000 सुविधा शुल्क मांगने और रकम देने से इनकार करने पर ₹20 हजार का चालान किए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, चालक के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला जांच का विषय जरूर बन गया है।दरअसल, हाथरस शहर में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नो एंट्री व्यवस्था लागू रहती है। नियम के मुताबिक भारी और मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक रहती है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि धरातल पर इस व्यवस्था का पालन समान रूप से नहीं हो रहा है।ताजा मामला इगलास रोड का बताया जा रहा है। ट्रक चालक के मुताबिक वह नो एंट्री शुरू होने से पहले करीब 7 बजे माल का वजन कराने धर्मकांटे पर पहुंचा था। उस समय उसे किसी ने नहीं रोका।
आरोप है कि करीब 7:30 बजे वापस लौटते समय ट्रैफिक कर्मियों ने उसे रोक लिया और ₹3000 की मांग की। चालक का कहना है कि उसने यह कहते हुए रकम देने से इनकार कर दिया कि अभी नो एंट्री का समय शुरू ही नहीं हुआ है। इसके बाद उसका ₹20 हजार का चालान कर दिया गया।वहीं सवाल यह भी है कि अगर चालक नो एंट्री लागू होने से पहले पकड़ा गया था, तो चालान किस समय और किस नियम के तहत किया गया? चालान में दर्ज समय की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक तरफ बड़े ट्रकों पर सख्ती की जाती है, वहीं दूसरी तरफ डीसीएम, आईसर कैंटर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां नो एंट्री के दौरान शहर में दिखाई देती हैं, जबकि नो एंट्री का नियम उन पर भी लागू है। सुबह 11:00 से 2 घंटे के लिए व्यापारियों के वाहनों पर एंट्री छूट है। लेकिन उस समय से पहले भी और उस के समय के बाद भी यह वाहन शहर में कहीं भी आपको दिखाई दे जाएंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन वाहनों को प्रवेश की अनुमति किस आधार पर मिल रही है?वहीं स्थानीय कोल्ड मा, गेस्ट हाउस मालिक, धर्म कांटा संचालक और बड़े वाहनों के मिस्त्रियों की मांग है कि जब पहले नो एंट्री सड़क के नगला बांबे तक लगती थी तो अब उस नो एंट्री को हाईवे तक बढ़ाने का क्या औचित्य है।अब जरूरत है निष्पक्ष जांच की, ताकि यह साफ हो सके कि नो एंट्री व्यवस्था वास्तव में यातायात नियंत्रण के लिए है या फिर कुछ वाहन चालकों के उत्पीड़न का जरिया बन रही है या सफेद कपड़ों की आमदनी का जरिया।
मनोज शर्मा की रिपोर्ट



