विधान परिषद चुनाव के लिए पीठासीन एवं मतदान अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश

अलीगढ़विधान परिषद निर्वाचन-2026 को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए गुरुवार को कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर में पीठासीन अधिकारियों एवं मतदान अधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। मास्टर ट्रेनर मोहम्मद शाहबुद्दीन ने अधिकारियों को मतदान प्रक्रिया, उनके दायित्वों और निर्वाचन संबंधी विभिन्न प्रावधानों की व्यावहारिक जानकारी दी।मुख्य विकास अधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी कार्मिक योगेंद्र कुमार ने अधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जनपद में 37 मतदान केंद्रों पर 67 मतदेय स्थल बनाए गए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर एक सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती रहेगी और मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए 74 माइक्रो ऑब्जर्वर लगाए गए हैं। मतदान 23 अक्टूबर को प्रातः 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतपेटिका एवं मतपत्र की मदद से मतदान संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में बताई गई बातों को अच्छे से आत्मसात करें ताकि निर्वाचन के दौरान प्रत्येक समस्या का समाधान कर सकें।मास्टर ट्रेनर मोहम्मद शाहबुद्दीन ने प्रशिक्षण में स्पष्ट किया कि मतदान दल मतदान से एक दिन पूर्व नौरंगीलाल इंटर कॉलेज पहुंचकर मतदान सामग्री प्राप्त करेंगे और चेकलिस्ट के अनुसार सभी सामग्री का मिलान करेंगे। मतपेटी, लिफाफे, अमिट स्याही सहित अन्य सामग्री की भली-भांति जांच करने के निर्देश दिए गए। मतदान केंद्र पर पहुंचने के बाद केंद्र की व्यवस्था का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान को प्रभावित करने वाली कोई सामग्री अथवा व्यवस्था वहां न हो।
उन्होंने बताया कि मतदान केंद्र पर महिला एवं पुरुष मतदाताओं के लिए अलग-अलग कतार और प्रवेश और निकासी की पृथक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मतदान प्रारंभ होने से पूर्व अभिकर्ताओं की उपस्थिति में मतपेटी को खोलकर खाली होने का प्रदर्शन करने के बाद उसे सीलबंद कर मतदान निर्धारित समय पर शुरू कराया जाएगा। मतदान की गोपनीयता हर स्थिति में बनाए रखने के निर्देश दिए गए।प्रशिक्षण में बताया गया कि मतदाता को मतदान के लिए बैंगनी रंग का पेन उपलब्ध कराया जाएगा। स्नातक निर्वाचन के लिए अंग्रेजी का ‘ळ’ और शिक्षक निर्वाचन के लिए अंग्रेजी का ‘ज्’ निर्धारित किया गया है। मतदान अधिकारी प्रथम निर्वाचक नामावली की चिन्हित प्रति एवं मतदाताओं की पहचान की प्रक्रिया के लिए उत्तरदायी होंगे, जबकि मतदान अधिकारी द्वितीय मतपत्रों के बंडलों के प्रभारी रहेंगे और नियमानुसार अमिट स्याही लगाने का कार्य करेंगे। स्नातक मतदाता की तर्जनी और शिक्षक मतदाता की मध्यमा उंगली पर अमिट स्याही लगाने की प्रक्रिया भी समझाई गई। मतदाता अपना मत 1, 2, 3, 4 …लिखकर अपना अधिमान देगा। वह जिस अभ्यर्थी के पक्ष में अपना अधिमान देना चाहता है उसके सम्मुख बैगनी पेन से 1 लिखेगा।अधिकारियों को यह भी बताया गया कि यदि कोई मतदाता अमिट स्याही लगवाने अथवा आवश्यक हस्ताक्षर करने से इनकार करता है तो उसे मतपत्र जारी नहीं किया जाएगा। मतदान अभिकर्ता की भूमिका एवं दायित्व स्पष्ट करते हुए बताया गया कि उनका प्रमुख कार्य मतदाता की पहचान से संबंधित प्रक्रिया में निर्धारित भूमिका निभाना है।प्रशिक्षण के दौरान निविदत्त मतपत्र, चौलेंज वोट, दिव्यांग एवं अशक्त मतदाताओं के मतदान, मतदान से इनकार की विभिन्न परिस्थितियों और मतपत्र को निर्धारित तरीके से मोड़ने की प्रक्रिया का भी विस्तार से अभ्यास कराया गया। पीठासीन अधिकारियों को मतदान संबंधी निर्धारित घोषणाएं निर्धारित प्रारूप एवं समय के अनुसार करने एवं मतदान समाप्ति के बाद निर्धारित वाहन से ही संग्रह केंद्र पहुंचने के निर्देश दिए गए।अंत में पीठासीन अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मतदान की पूरी प्रक्रिया से संबंधित निर्धारित 26 बिंदुओं की जानकारी पीठासीन डायरी में अनिवार्य रूप से दर्ज करें। प्रशिक्षण का उद्देश्य मतदान दलों को निर्वाचन प्रक्रिया की प्रत्येक बारीकी से अवगत कराते हुए भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना रहा। सभी पीठासीन अधिकारी एवं मतदान अधिकारियों ने प्रशिक्षण के उपरांत मतपेटिका को बड़े अच्छे से देखा और समझा, खोला और बंद करने की प्रकृति को भी समझा। प्रशिक्षण में डीडीओ सुभाष नेमा, पीडी डीआरडीए आर0के0 कुरील, सहायक निर्वाचन अधिकारी कौशल कुमार सहित प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।



