अलीगढ़
देहदान कर्त्तव्य संस्था द्वारा जागरूकता कैम्प व नवीन सदस्यों का सम्मान
सचिव डॉ जयंत शर्मा ने कहा कि संस्था 5/6 वर्षों से निर्बाध नेत्र/देहदान करा

देहदान कर्त्तव्य संस्था द्वारा अपने कार्यालय जीवन हॉस्पिटल, बेला मार्ग, विष्णु पुरी, अलीगढ़ पर सैकड़ों लोगों को नेत्र/देहदान के प्रति जागरुक किया गया। इस अवसर पर सचिव डॉ जयंत शर्मा ने कहा कि संस्था 5/6 वर्षों से निर्बाध नेत्र/देहदान करा रही है। अभी तक 83 नेत्रदान व 23 देहदान पार्थिव शरीरों से विभिन्न मैडिकल कॉलेज को करा चुके हैं।
डॉ एस के गौड़ ने नेत्र/देह दान की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि यही एक रास्ता है कि मरणोपरांत भी जीवित रह सकते हैं। क्योंकि आंखें (कौरनिया) लेने वाला जब तक जीवित रहेगा।आज वह ईश्वरी रंगीन दुनियां को आपके सहयोगी बनने पर ही तो देख पा रहा है। अगले जन्म में निश्चित ही उसे जरूर नेत्र मिलेंगे। क्योंकि उसने दो लोगों को सहयोग किया। शरीर दान के बाद मैडिकल कॉलेज में नाम तो लिखा जाता है साथ ही अंग व अस्थि मज्जा (हड्डियां) भी वर्षों तक उपयोग आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि आज 15/20 लोगों द्वारा संकल्पित होने पर पारिवारिक सदस्यों के सामने प्रशस्ति/परिचय पत्र भेंटकर सम्मानित किया। डॉ गौड़ ने कहा संस्था में डॉ, पत्रकार, सीए ,एडवोकेट द्वारा संकल्पित होने से विशेष बल मिल रहा है।
डॉ सुनील कुमार (अध्यक्ष हैंडस फॉर हेल्प)ने कहा कि संस्था उत्तम कार्य कर रही है। इससे बड़ा और कोई मानवीय कार्य हो ही नहीं सकता।एडवोकेट अनिल राज गुप्ता ने कहा कि मैं अपने समाचार पत्र में नेत्र/देहदानी की उठावनी का समाचार निश्शुल्क छापता हूँ। उन्होंने कहा कि कोई शहर की संस्था नहीं जो मरणोपरांत किसी मैडिकल कॉलेज में हमेशा के लिए मरणोपरांत दानी का नाम लिखवा दे। हाँ नेत्र/देह दान पश्चात निश्चित ही अमिट नाम लिख जाता है।
जगदीश सरन विशेष सहयोगी बने। उनके अथक प्रयासों से ही 8/10 लोग बबराला जैसे शहर में सदस्य बने हैं।
इस अवसर पर डॉ डी के वर्मा (मीडिया प्रभारी) , भुवनेश वार्ष्णेय आधुनिक , रक्त वीर अजय सिंह (सह सचिव )डॉ हरी सिंह यादव (पत्रकार),डॉ धर्मेन्द्र अस्थाना, अजय राणा, पप्पू, समाजसेवी दिलीप दामोदर वार्ष्णेय, किरण वार्ष्णेय आदि सहयोगी बने।