जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने जिला कारागार में लगाया विधिक साक्षरता शिविर
जिला कारागार का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला न्यायाधीश, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनुपम कुमार के निर्देशानुसार जिला कारागार में निरूद्ध विचाराधीन, दोषसिद्ध बन्दियों के मध्य विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिला कारागार की महिला बैरक का निरीक्षण अपर जिला जज, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव नितिन श्रीवास्तव द्वारा किया गया। विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर में उपस्थित जेलर कमलेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि जिला कारागार में दीवानी न्यायालय अलीगढ के कुल 1777 बन्दी निरूद्ध है। जिसमें से विचाराधीन बन्दियों की संख्या 1193, सिद्धदोष बन्दियों की संख्या 575, रोपकारबन्दियों की संख्या 02 व विदेशी बन्दियों की संख्या 07 है। विधिक साक्षरता शिविर में जिला कारागार के विभिन्न बैरकों में निरूद्ध दोषसिद्ध, विचाराधीन बन्दियों को अवगत कराया गया कि जिन विचाराधीन बन्दियों की जमानत आज से पूर्व न्यायालय द्वारा की जा चुकी है किन्तु जमानत बन्ध पत्र दाखिल न होने के कारण उनकी रिहाई अभी तक नही हो पायी है, वह अतिशीध्र न्यायालय में जमानत बन्ध पत्र दाखिल कराये। यदि जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नही है, अर्थात खेत बाडी नहीं है, आर्थिक संसाधन नहीं है, मजदूरी, खेतों में दिहाडी पर काम करना, छोटी-मोटी दुकान इत्यादि है वे इस सन्दर्भ में कारागार में नियुक्त पीएलवी अथवा जिला कारागार में नियमित दौरे पर जाने वाले लीगल एड डिफेंस काउन्सिल के द्वारा एक प्रार्थना पत्र सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अलीगढ़ के नाम प्रेषित करायें। तत्पश्चात विचाराधीन बन्दी के प्रार्थना पत्र पर आवश्यक कार्यवाही कर विचाराधीन बन्दी की जमानत की शर्ताे को शिथिल कराने का प्रयास किया जायेगा। सचिव द्वारा अवगत कराया गया कि आप अपने-अपने बैरकों में निरूद्ध अन्य दोषसिद्ध, विचाराधीन बन्दियों को जमानत के उपरान्त रिहाई के सम्बन्ध में जो सूचनायें उपलब्ध करायी गयी है उसके बारे मे अवगत कराये ताकि वे भी लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि यदि आप लोगों के बैरकों में कोई ऐसा बन्दी निरूद्ध हो, जिसके पास अधिवकता न हो, तो उसे उसके वाद की पैरवी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जायेगा। जो निजी अधिवक्ता की भांति ही विचाराधीन बन्दियों के प्रकरण मे उनकी पैरवी करेगासाक्षरता शिविर में उपस्थित 07 पुरूष बन्दियों द्वारा निःशुल्क सरकारी अधिवक्ता उपलब्ध कराने के लिऐ कहा गया। इस पर सचिव द्वारा जेल पराविधिक स्वयं सेवक एवं उपस्थिति असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउन्सिल को आदेशित किया गया कि वह उक्त बन्दियों से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने के बावत प्रार्थना पत्र लेकर उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करायें ताकि उस पर नियमानुसार कार्यवाही की जा सके विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर में उपस्थित 08 विचाराधीन बन्दियों द्वारा आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण जमानती दाखिल करने में असमर्थ है, के सम्बन्ध में निवेदन किया गया। इस पर शिविर में उपस्थित असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउन्सिल कृष्ण कुमार को निर्देशित किया गया कि वे उक्त विचाराधीन बन्दियों के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही कर कृत कार्यवाही से सचिव को अवगत करायें। विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जिला कारागार में निरूद्ध रोपकार बन्दी को बुलाकर पूछताछ की गयी तो उक्त बन्दी द्वारा अवगत कराया गया कि अलीगढ में उसका कोई नहीं है उसका लडका हरियाणा में रहता है बन्दी द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि उसके लडके की उसे कोई जानकारी नहीं है। इस पर सचिव द्वारा उक्त रोपकार बन्दी से कहा गया कि आप माननीय उच्च न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल कराने के लिए एक प्रार्थना पत्र सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करायें ताकि आपके उक्त प्रार्थना पत्र माननीय उच्च न्यायालय लीगल एड सिर्विस कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर के सम्पन्न होने के उपरान्त सचिव द्वारा महिला बैरक का गहनता से निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जेलर कमलेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि जिला कारागार में दीवानी न्यायालय अलीगढ की 68 महिला बन्दी, महिला बैरक में निरूद्ध है एवं महिला बन्दियों के साथ रह रहे बच्चों की संख्या 06 है। सचिव द्वारा उपस्थित महिला बन्दियों से पूछा गया कि उनके बच्चों को भोजन के रूप में जिला कारागार द्वारा क्या-क्या चीज उपलब्ध करायी जाती है इस पर वहॉ पर उपस्थित एक शिशु की माता (महिला बन्दी) द्वारा अवगत कराया गया कि जिला कारागार में 06 शिशुओं में से प्रत्येक शिशु को आधा लीटर दूध का एक पैकेट, 01 केला, बिस्कुट एवं भोजन दिया जाता है। उक्त महिला बन्दी द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि उसे भी आधा लीटर का एक पैकेट दूध का दिया जाता है। वहॉ पर उपस्थित महिला बन्दियों से पूछा गया कि यदि किसी महिला की जमानत हो चुकी है किन्तु उसकी रिहाई नहीं हुयी है तो वे अवगत कराये। उसकी रिहाई के सम्बन्ध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अलीगढ़ की तरफ से नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। यदि किसी महिला बन्दी के वाद की पैरवी के लिए कोई निजी अधिवक्ता नहीं है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल उपलब्ध कराया जायेगा। वहॉ पर उपस्थित किसी महिला बन्दी ने उक्त के बावत कोई जानकारी साक्षा नहीं की। प्रशासनिक आधार पर जिला अलीगढ़ की महिला बैरक में निरूद्ध एक महिला बन्दी द्वारा अवगत कराया गया कि वह एक सजायाफता महिला बन्दी है न्यायालय द्वारा उसके ऊपर 65000 रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है जिसको भरने में वह अक्षम है इस बावत आप मेरी मदद करें। सचिव द्वारा उक्त महिला बन्दी को आश्वासन दिया गया कि आप द्वारा निर्गत की गयी उक्त बातों की सूचना प्रार्थना पत्र के माध्यम से सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा को दी जायेगी ताकि वह आपके प्रार्थना पत्र पर आवश्यक कार्यवाही कर सके। विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर एवं कारागार निरीक्षण के समय डिप्टी जेलर राजकुमार, चीफ लीगल एड डिफंेस काउन्सिल जगदीश सारस्वत, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफंेस काउन्सिल इन्द्रजीत सिंह चड्ढा, असिस्टेंट लीगल एड डिफंेस काउन्सिल कृष्ण कुमार व श्रीमती पूजा सैनी एवं एडीआर सेन्टर में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक मनोज कुमार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में कार्यरत डाटा एन्ट्री ऑपरेटर राहुल कुमार व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरूणी सिंह उपस्थित रहे।



