अलीगढ़

फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा उपलब्ध कराएगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) एवं रक्त कैंसर की ओपीडी अलीगढ़ में

नवजीवन अस्पताल रामघाट रोड़ अलीगढ़ में ओपीडी की शुरुआत

अलीगढ़,: बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यानी अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण एवं रक्त कैंसर पर भारत में सबसे अग्रणी और विश्वसनीय फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा ने नवजीवन अस्पताल रामघाट रोड़ अलीगढ़ में ओपीडी की शुरुआत की है। इसे लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन होटल आभा रीजेंसी, रामघाट रोड, न्यू विष्णुपुरी, अलीगढ़ में तीन अप्रैल को किया गया। प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया कि ओपीडी में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। डॉ. प्रवीण वार्ष्णेय, सीनियर कंसलटेंट-इंटरनल मेडिसिन विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
डॉ राहुल भार्गव, प्रिंसीपल डायरेक्टर एवं चीफ हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ओंकोलॉजी एंड बीएमटी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम एवं नोएडा ने कहा, “फोर्टिस का बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) प्रोगाम देश में अपनी तरह के सबसे बड़े प्रोग्रामों में से एक है, जो मरीजों के लिए विस्तृत देखभाल तथा उनके जीवन को बदलकर रख देने वाले उपचार विकल्पों में से है। हम सटीक तरीके से कैंसर के उपचार के लिए इम्यून सिस्टम की ताकत का इस्तेमाल करने वाली सीएआर-टी सेल थेरेपी को और अधिक उन्नत बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए गर्व महसूस कर रहे हैं। बीएमटी के क्षेत्र में हमारी विशेषज्ञता के साथ-साथ अत्याधुनिक सीएआर-टी सेल थेरेपी का मेल कराकर, हम अपने मरीजों के लिए सबसे इनोवेटिव और कारगर उपचार विकल्पों को उपलब्ध करा रहे हैं ताकि हम सर्वेश्रेष्ठ संभव परिणामों को साकार कर सकें। फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए विशिष्ट और समर्पित टीम तथा सर्वाधिक उन्नत टेक्नोलॉजी का शानदार मेल उपलब्ध है।”डॉ. प्रियांशी पचौरी, एसोसिएट कंसल्टेंट-हेमेटोलॉजी, हेमेटो-आॅन्कोलॉजी और बीएमटी (रक्त कैंसर रोग विशेषज्ञ) , फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा ने बताया कि फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) एवं रक्त कैंसर कार्यक्रम भारत में सबसे उच्च कोटि का इलाज प्रदान करता है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें रोगग्रस्त अस्थि मज्जा को स्वस्थ अस्थि मज्जा से बदल दिया जाता है। यह प्रक्रिया, कुछ तरह के रक्त विकारों और कैंसर के इलाज में मदद करती है। जब कैंसर को ठीक करने के लिए आवश्यक कीमोथेरेपी या विकिरण की खुराक इतनी अधिक होती है कि उपचार से व्यक्ति की अस्थि मज्जा स्टेम कोशिकाएँ स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त या नष्ट हो जाएँगी, तो अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।“हेमेटोन्कोलॉजी चिकित्सा की एक शाखा है जो रक्त कैंसर और अन्य रक्त संबंधी विकारों के निदान और उपचार से संबंधित है। इनमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मायलोमा जैसे रक्त कैंसर, विभिन्न प्रकार के एनीमिया और अन्य दुर्लभ रोग शामिल हैं। डॉ. प्रियांशी ने बताया कि यहां रोगियों को केवल उपचार नहीं मिलेगा बल्कि व्यापक देखभाल मिलती है जो उपचार के जरिए उनका जीवन बदलने में सहायक है। डॉ. प्रियांशी ने कहा कि अत्याधुनिक सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा के साथ अपनी व्यापक बीएमटी विशेषज्ञता को जोड़कर, हम रोगियों को सबसे नवीन और प्रभावी उपचार विकल्प प्रदान कर रहे हैं, जो सर्वोत्तम संभव परिणाम देने के लिए हमारी अटूट प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। हमें सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा को आगे बढ़ाने में हम नेतृत्वकर्ता है और इस पर हमें गर्व है। इस दौरान डॉ. प्रवीण वार्ष्णेय भी मौजूद रहे।

JNS News 24

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