गाजियाबाद। महज 32 साल के हरीश राणा की इच्छा मृत्यु मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, हरीश राणा के लिए बुधवार को इच्छामृत्यु की मंजूरी दे दी
उच्च न्यायालय में इच्छामृत्यु की अपील की

गाजियाबाद। महज 32 साल के हरीश राणा की हालत देखकर रूह कांप जाती है। उनके शरीर में कोई हरकत नहीं होती है। हरीश 2013 से बिस्तर पर हैं। वह कोमा में हैं।एक गंभीर हादसे के बाद हरीश क्वाड्रिप्लेजिया (100 प्रतिशत विकलांगता) से पीड़ित हो गए थे। उनका जीवन पूरी तरह से मशीनों और उपकरणों पर निर्भर हो गया।उन्हें यूरिन बैग लगा था और ट्यूब के माध्यम से खाना दिया जाता है। उनके माता-पिता का कहना था कि अब वे अपने बेटे की लंबी उम्र की नहीं, बल्कि उसकी मुक्ति चाहते हैं।हरीश की मां, निर्मला देवी ने कहा- कभी नहीं सोच सकते थे कि कभी ऐसी स्थिति भी आएगी कि जब बेटे की लंबी उम्र की नहीं बल्कि उसकी मुक्ति की दुआ करनी पड़ेगी।उन्होंने उच्च न्यायालय में इच्छामृत्यु की अपील की थी, जिससे हरीश को उसके दर्दनाक जीवन से मुक्ति मिल सके। हालांकि, 8 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय ने इस अपील को खारिज कर दिया था।
इच्छामृत्यु मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसने हरीश राणा के लिए बुधवार को इच्छामृत्यु की मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, अब एम्स में हरीश की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह फैसला हरीश और उनके परिवार के लिए दर्द और तकलीफों से भरा हुआ है। हरीश का परिवार एक ऐसे मोड़ पर खड़ा था, जहां मौत को ही एकमात्र रास्ते के रूप में देखा जा रहा था। उनके माता-पिता के लिए 13 साल से हर दिन अपने बेटे को इस दर्द से जूझते हुए देखना असहनीय हो गया था। अब, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके बेटे को मुक्ति मिल सकती है।



