नगर आयुक्त का बड़ा एक्शन-पूर्व मुख्य नगर अधिकारी डॉ. नन्द किशोर व अवर अभियंता गय्यूर अहमद प्रकरण के विरुद्ध नगर आयुक्त ने दर्ज करायी एफआईआर-
दोनों दोषी अधिकारियों के विरुद्ध शासन स्तर से पेंशन रोकने हेतु संस्तुति के साथ कठोर कार्रवाई हेतु नगर आयुक्त द्वारा शासन को पत्र भेजा जा रहा है

नगर निगम की बेशकीमती जमीन निजी पक्ष को देने का मामला: पूर्व अधिकारी और संपत्ति प्रभारी के खिलाफ मुकदमाजीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्रवाई: 18 करोड़ की अधिग्रहित भूमि प्रकरण में दो पूर्व अधिकारियों पर केस दर्जनगर इतिहास की बड़ी वैधानिक कार्रवाई: सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचाने के आरोप में पूर्व अधिकारियों पर एफआईआरनगर निगम की अधिग्रहित सार्वजनिक भूमि को अवैध रूप से नुकसान पहुँचाने के प्रकरण में नगर आयुक्त का बड़ा एक्शन-दर्ज हुई एफ.आई.आरनगर निगम की भूमि के साथ अनियमितता, फर्जीवाड़ा, पद के दुरुपयोग व सार्वजनिक हित की भूमि को निजी पक्षों के लाभ हेतु प्रभावित करने पर नगर इतिहास की सबसे बड़ी वैधानिक कार्रवाई18 करोड़ की बेशक़ीमती सार्वजनिक हित की भूमि को निजी पक्षों को देना पर सिविल लाइन थाने में दर्ज हुई एफआईआरमाननीय मुख्यमंत्री महोदय उत्तर प्रदेश शासन श्री योगी आदित्यनाथ जी की मंशा के अनुरूप अपराध और भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर प्रभावी कार्रवाई करने के क्रम में नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने नगर निगम की भूमि के साथ अनियमितता, फर्जीवाड़ा एवं पद का दुरूपयोग करते हुए सार्वजनिक हित की लगभग 18 करोड़ की बेशक़ीमती भूमि को निजी पक्षो के नाम करने के गंभीर प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम अलीगढ़ में तैनात रहे मुख्य नगर अधिकारी डॉ. नन्द किशोर व पूर्व अवर अभियंता/संपत्ति अधिकारी गयूर अहमद के विरुद्ध नगर निगम के संपत्ति विभाग द्वारा सिविल लाइन थाने में एक और एफआईआर दर्ज कराई गई है।
♦️प्रकरण का विवरण♦️
सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह ने बताया कि अलीगढ़ नगर निगम की अधिग्रहित सरकारी संपत्ति से संबंधित गंभीर अनियमितताओं एवं राजकीय भूमि को नुकसान पहुँचाने के प्रकरण में थाना सिविल लाइंस, जनपद अलीगढ़ में प्रथम सूचना रिपोर्ट (F.I.R.) दर्ज कराई गई है। यह रिपोर्ट दिनांक 11 मार्च 2026 को सायं 19:13 बजे पंजीकृत की गई, जिसका एफआईआर नंबर 0125/2026 है। प्रकरण भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468 एवं 471 के अंतर्गत दर्ज किया गया है, जो धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना एवं जाली दस्तावेज के प्रयोग से संबंधित गंभीर अपराध हैं।
सहायक नगर आयुक्त/संपत्ति प्रभारी ने बताया कि यह मामला नगर निगम अलीगढ़ की अधिग्रहित भूमि गाटा संख्या 3315, क्षेत्रफल लगभग 01 बीघा 03 बिस्वा पुख्ता, स्थित ग्राम क़स्बा कोल, अलीगढ़ से संबंधित है। उक्त भूमि वर्ष 1946–47 में विधिवत भूमि अर्जन प्रक्रिया के तहत तत्कालीन नगर पालिका (वर्तमान नगर निगम) के स्वामित्व में आई थी और तब से यह नगर निगम की संपत्ति के रूप में अभिलेखों में दर्ज रही है।
♦️समिति की रिपोर्ट पर नगर आयुक्त का एक्शन♦️
सहायक नगर आयुक्त ने बताया कि नगर आयुक्त महोदय के आदेश दिनांक 22 जनवरी 2026 के अनुपालन में गठित जांच समिति द्वारा अभिलेखों, न्यायालयीन वादों एवं पूर्व आदेशों का परीक्षण किया गया। समिति की रिपोर्ट दिनांक 12 फरवरी 2026 में यह तथ्य प्रकाश में आया कि दिनांक 02 अप्रैल 2002 को उक्त भूमि के संबंध में न्यायालय में एक समझौता प्रस्तुत किया गया था, जो नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर तथा बिना सक्षम अनुमति के किया गया प्रतीत होता है। प्रकरण व जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर नगर आयुक्त महोदय द्वारा तत्काल दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराए जाने के आदेश दिए गए।
♦️एफआईआर में जिन व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिक सूचना दर्ज की गई है, उनका विवरण इस प्रकार है♦️
✅डॉ. नन्द किशोर, तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी (उस समय नगर पालिका/नगर निगम से संबंधित अधिकारी), पिता का नाम अज्ञात, निवासी — मुख्य नगर अधिकारी आवास, नगर निगम अलीगढ़, सिविल लाइंस, अलीगढ़।
✅श्री गय्यूर अहमद, तत्कालीन संपत्ति अधिकारी, नगर निगम अलीगढ़, पिता का नाम अज्ञात, निवासी — संपत्ति अधिकारी आवास, नगर निगम अलीगढ़, सिविल लाइंस, अलीगढ़।
सहायक नगर आयुक्त ने बताया कि जांच में पाया गया कि उपरोक्त अधिकारियों द्वारा दिनांक 02.04.2002 को न्यायालय में प्रस्तुत समझौते के माध्यम से नगर निगम की अधिग्रहित भूमि के एक हिस्से को वादिनी पक्ष के हित में छोड़ा गया तथा बदले में अन्य भूखंड से मार्ग देने जैसी व्यवस्था दर्शाई गई। यह कार्रवाई न तो नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति से की गई थी और न ही शासन की अनुमति प्राप्त थी। आरोप है कि उक्त समझौते के माध्यम से सरकारी भूमि के स्वामित्व, उपयोग एवं सार्वजनिक हित को प्रभावित किया गया, जिससे नगर निगम को भारी वित्तीय एवं संपत्ति संबंधी क्षति पहुँची। समिति के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत जारी शासनादेशों के रहते किसी भी अधिकारी को एकतरफा समझौता करने का अधिकार नहीं था।
एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि संबंधित अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया तथा जानबूझकर नगर निगम की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। इस प्रकरण में नगर निगम को अनुमानित रूप से करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि से वंचित होना पड़ा।
♦️नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा♦️
*माननीय मुख्यमंत्री महोदय की मंशा के अनुरूप भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अलीगढ़ नगर निगम द्वारा प्रभावी रूप से अपनी जा रही है। सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर की गई अनियमितता या भ्रष्ट आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई के साथ साथ दोनों दोषी अधिकारियों के विरुद्ध शासन स्तर से पेंशन रोकने हेतु संस्तुति के साथ कठोर कार्रवाई हेतु शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
इस प्रकरण की जांच में जो भी अन्य व्यक्ति संलिप्त पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह कार्रवाई पारदर्शिता एवं जनहित की भावना से की गई है, ताकि नगर निगम की संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण या दुरुपयोग न हो सके।*



