हाथरस

वाह रे सिंचाई विभाग: 27 दिन में पांच दफा नहरें कटीं, 600 बीघा फसल बर्बाद, सारा दोष चूहों पर मढ़ा

0 नवंबर से 17 दिसंबर तक पांच बार नहरें कटीं जिससे 600 बीघा फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो गई।

हाथरस। नहर और रजबहा कटने सक किसानों की फसल बर्बाद हो रही हैं। सिंचाई विभाग इसका जिम्मेदार चूहे और सेही को मान रहा है। विभाग का कहना है कि किसान अपने खेतों तक पानी ले जाने के लिए कुलावे लगा लेते हैं। बाद में यहीं चूहे और सेही बिल बना लेते हैं। पहले हल्के हल्के पानी का रिसाव होता है और बाद में बड़ी मात्रा में पानी खेतों में घुस जाता है। कभी नहर कट जा रही है तो कभी रजबहा। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। 20 नवंबर से 17 दिसंबर तक पांच बार नहरें कटीं जिससे 600 बीघा फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो गई। सिंचाई विभाग का कहना है कि किसान अपने खेतों तक पानी ले जाने के लिए कुलावे लगा लेते हैं। बाद में यहीं चूहे और सेही बिल बना लेते हैं। पहले हल्के हल्के पानी का रिसाव होता है और बाद में बड़ी मात्रा में पानी खेतों में घुस जाता है। वहीं किसानों का कहना है कि नहर की पटरियों की विभाग मरम्मत नहीं कराता जिससे वह कमजोर होकर टूट जाती हैं और पानी खेतों में पहुंच जाता है। ब्रांच नहर से जिले के 25000 किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। 1 लाख हेक्टेयर से भी अधिक भूमि की सिंचाई नहरों से होती है। होना तो यह चाहिए कि नहरों की तड़ीझाड़ सफाई हो। पटरियों की नियमित मरम्मत हो लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। पहले हल्का सा कट लगता है और फिर वही बड़ा आकार ले लेता है। जिससे नहर का पानी खेतों में चला जाता है। इस प्रकार के मामले आए दिन प्रकाश में आ रहे हैं।रजबहा की पटरी की कटने से हुई थी फसल बर्बादबीस नवंबर से लेकर 17 दिसंबर जिले में छह स्थानों पर नहर व रजबहा की पटरी की कट चुकी है। इस वजह से करीब 100 किसानों की छह सौ बीघा फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है। सहपऊ क्षेत्र में माइनरों के ओवरफ्लो होने की वजह से पानी खेतों में पहुंच गया था। कलवारी निवासी यदुवीर सिंह, राजू निवासी कैमार, तमना गढ़ी निवासी राजीव और जोगिया निवासी अमित पौरुष का कहना है कि सिंचाई विभाग नहरों की मरम्मत नहीं कराता है। जगह जगह से टूट जाती हैं। इससे किसानों की फसलें चौपट हो जाती हैं। किसानों को मुआवजा तक नहीं मिलता है।अलीगड़ रोड स्थित गांव चिंतापुर पर कटी नहरी पटरीगांव अहवरनुपर व मुरसान के गांव उदयभान में नहर की पटरी कटने से करीब 400 बीघा आलू, गेहूं व सरसों की फसल बर्बाद हुई है। अफसरों का कहना है कि किसान अपने खेतों में सिंचाई के लिए पटरियों के नीचे छेद कर कुलावे लगाते हैं। इसके बाद जब मिट्टी में नमी होती है , तो मिट्टी धीरे टूट जाती है और पानी का बहाव खेतों की ओर हो जाता है। विभाग की मानें तो नहर की दीवारों में चूहे व सेही बिल बना लेते हैं। इस कारण पानी इन बिलों में से होकर रिस जाता है।ये मामले आए सामने

केस नंबर 1- 20 नवंबर को पीहुरा नगला मनी माइनर पर लगी पुलिया पर कूड़ा इकट्ठा होने के कारण पानी ओवरफ्लो होने से इस माइनर की पटरी कट गई थी। किसानों की 60 बीघा आलू एवं गेहूं की फसल नष्ट हो गई थी। किसानों में लायक सिंह नेताजी का 12 बीघा का आलू, योगेंद्र सिंह के पांच बीघा आलू और तीन बीघा गेहूं इसी प्रकार रविंद्र सिंह के छह बीघा आलू बनवारी के छह बीघा आलू और अन्य किसानों के आलू और गेहूं के खेत शामिल हैं।केस नंबर 2- 21 नवंबर को शाहबाजपुर माइनर के अंतिम सिरे पर बनी दो नालियों में एक नाली की सफाई होने के कारण दूसरी नाली में पानी ओवरफ्लो हो गया था जिससे करीब 30 बीघा फसल आलू व गेंहू की नष्ट हो गई थी। किसानों का आरोप था कि माइनर में बनी नालियों की सफाई न होने के कारण यह फसल बर्बाद हुई है।केस नंबर 3- 5 दिसंबर को गांव लाखनू में नहर की पटरी कटने से करीब 90 बीघा आलू व सरसों की फसल में पानी भर गया। किसानों का कहना था कि अचानक नहर में तेज पानी आने के वजह से पटरी कट गई और पानी तेज बहाव के साथ खेतों में पहुंच गया।केस नंबर 4 -17 दिसंबर को मुरसान क्षेत्र के गांव उदयभान के निकट रजवाहा की पटरी कटने से करीब 50 बीघा गेहूं व 50 बीघा आलू की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। किसानों का कहना था कि पानी छोड़ने से पहले ही पहले पटरी को संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा चेक नहीं किया गया था। कई जगहों पर पटरी कमजोर पड़ी हुई थी। जिसके कारण उनके खेत पर रजवाहा की पटरी कट गई।केस नंबर 5- 20 नवंबर को गांव चिंतापुर पर नहर की पटरी कटने से करीब 300 बीघा गेहूं, सरसों, धान की फसल जलमग्न हो गई। बमुश्किल नहर की पटरी को मिट्रटी के कट्टे व अन्य सामान लगाकर सही करने का कार्य किया गया।बलजीत सिंह, एक्सईन, सिंचाई विभाग का कहनाहाथरस। बलजीत सिंह, एक्सईन, सिंचाई विभाग सिंचाई विभाग का कहना है यह
नहर व माइनरों में कुलावे लगाए जाते हैं, इसकी वजह से चूहे व सेही भी बिल बना लेते हैं। जब तेजी से पानी आता है तो माइनर व नहरों के कटने की संभावना बनी रहती है। इस वर्ष में करीब 20 किसानों ने अवैध कुलावे काटने के मामले में मुकदमा दर्ज हुए हैं।-

JNS News 24

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