अलीगढ़

अलीगढ़  टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में जिले में सरकारी एवं निजी चिकित्सा क्षेत्र के समन्वय से अभिनव पहल शुरू

जिलाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देश पर निजी चिकित्सकों से टीबी का उपचार करा रहे मरीजों को भी राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत निःशुल्क टीबी दवाएं उपलब्ध कराई

निजी चिकित्सक से इलाज, सरकारी व्यवस्था से निःशुल्क टीबी दवा जिले में टीबी मरीजों के आर्थिक बोझ को कम करने की अभिनव पहल निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए 541 निजी चिकित्सक, 74 निजी केमिस्ट और 37 निजी पैथोलॉजी लैब को टीबी नोटिफिकेशन से जोड़ा गया अलीगढ़  टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में जिले में सरकारी एवं निजी चिकित्सा क्षेत्र के समन्वय से अभिनव पहल शुरू की गई है। जिलाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देश पर निजी चिकित्सकों से टीबी का उपचार करा रहे मरीजों को भी राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत निःशुल्क टीबी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। 2099 में से 994 मरीज चिन्हित, निजी चिकित्सक के परामर्श के साथ निःशुल्क दवा जिले में निजी क्षेत्र से उपचार प्राप्त कर रहे 2099 टीबी मरीजों में से 994 मरीजों को चिन्हित कर प्रमुख निजी चिकित्सकों के माध्यम से एन टी ई पी के अंतर्गत उपलब्ध चार दवा संयोजन सहित आवश्यक टीबी दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे मरीज निजी चिकित्सक से अपना उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श जारी रखते हुए सरकारी व्यवस्था से दवाएं निःशुल्क प्राप्त कर सेहतमंद हो रहे हैं। उपचार बीच में न छूटे, आर्थिक बाधा बने रोड़ा पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवाओं के खर्च के कारण कोई मरीज टीबी का उपचार बीच में न छोड़े। निःशुल्क दवाएं उपलब्ध होने से मरीजों और उनके परिवारों पर उपचार का आर्थिक बोझ कम होगा और नियमित एवं पूरा उपचार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। टीबी उन्मूलन में अलीगढ़ की मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था जिले में टीबी जांच एवं उपचार के लिए 75 नॉट मॉड्यूल, 29 नॉट प्रयोगशालाएं, 06 हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनें और 01 कल्चर एवं डी एस टी प्रयोगशाला उपलब्ध हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए 541 निजी चिकित्सक, 74 निजी केमिस्ट और 37 निजी पैथोलॉजी लैब टीबी नोटिफिकेशन से जुड़े हैं। वर्ष 2023 में 10, वर्ष 2024 में 136 और वर्ष 2025 में 97 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। वर्ष 2024 से 2026 तक उपचाराधीन मरीजों को 64,343 पोषण पोटलियां भी वितरित की जा चुकी हैं। संदेश स्पष्ट है कि मरीज किसी भी चिकित्सक से इलाज कराए, दवा के अभाव में उपचार नहीं रुकना चाहिए। जिलाधिकारी की यह पहल सरकारी कार्यक्रम और निजी चिकित्सा क्षेत्र के बेहतर समन्वय का उदाहरण बनते हुए टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और गति प्रदान कर रही है।

JNS News 24

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