अलीगढ़

शिक्षा से रोजगार, शोध से समृद्धि और कौशल से आत्मनिर्भर भारत की नींव : प्रो. धीरेंद्र पाल सिंह

एनईपी को धरातल पर उतारने से ही विकसित भारत @ 2047 का संकल्प होगा सिद्ध

अलीगढ़ : मा0 मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के शिक्षा सलाहकार प्रो0 धीरेंद्र पाल सिंह की अध्यक्षता में आयुक्त सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में ठोस रणनीति पर मंथन किया गया। बैठक में शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर रोजगार, स्वरोजगार, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।प्रो0 धीरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी की स्पष्ट सोच है कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। यदि बेसिक शिक्षा मजबूत होगी, तभी माध्यमिक, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा जीवन की नींव है और इसी नींव पर आत्मनिर्भर भारत का भवन खड़ा किया जा सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा और संस्कार एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। गांधी, मालवीय, राधाकृष्णन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और महंत दिग्विजयनाथ जी जैसे महापुरुषों का दृष्टिकोण भी ऐसा ही था, जहां शिक्षा चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और सेवा भाव से जुड़ी हो।प्रो0 सिंह ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा की सफलता का मापदंड यह होना चाहिए कि विद्यार्थी शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार पाने या स्वयं का रोजगार खड़ा करने में सक्षम हो। यही राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत @2047 की परिकल्पना कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि सुनियोजित रोडमैप है। बड़े राष्ट्र के निर्माण के लिए बड़े लक्ष्य और दीर्घकालिक सोच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की ताकत से भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाया जा सकता है। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि विकसित राष्ट्र के चार मजबूत स्तंभ: युवा, महिला, गरीब और किसान हैं। शिक्षा नीति का उद्देश्य इन चारों वर्गों को कौशल, अवसर और आत्मविश्वास देना है। इसके लिए टैलेंट, ट्रेड, टूरिज्म, ट्रेडीशन और टेक्नोलॉजी को शिक्षा से जोड़ते हुए समग्र विकास मॉडल अपनाने पर सहमति बनी।
प्रो0 सिंह ने कहा कि विद्यालय और महाविद्यालय टैलेंट फैक्ट्री बनें, जहां से न केवल नौकरी खोजने वाले बल्कि नौकरी देने वाले युवा निकलें। हर नागरिक शिक्षित हो, तकनीकी रूप से दक्ष हो और उसे स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर मिलें, इसी दिशा में शिक्षा तंत्र को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि मंडल एवं जिला स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम लागू किए जाएं, ताकि शिक्षा सीधे उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन और कौशल विकास से जुड़ सके। इससे पलायन रुकेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।संयुक्त शिक्षा निदेशक मनोज गिरी ने शिक्षा क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए प्रशासनिक अनुभव साझा किए। डीआईओएस पूरन सिंह ने प्रोजेक्ट अलंकार, एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम, आईसीटी लैब, प्रवीण योजना और खेल गतिविधियों को शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का आधार बताते हुए तकनीकी दक्षता पर बल दिया।
मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार ने कहा कि प्रो0 डी पी सिंह जी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में जो अहम सुझाव दिए हैं इनसे जिला एवं मण्डल अवश्य ही लाभान्वित होगा। उन्होंने अधिकारियों से प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिर्माण की प्रयोगशाला बनाना होगा। छात्रों में नैतिक मूल्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति विकसित करना शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।अपर आयुक्त अखिलेश कुमार ने कहा कि अलीगढ़ का भौगोलिक और औद्योगिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है। जेवर एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक निवेश के चलते आने वाले समय में जिला तकनीकी शिक्षा, रोजगार, स्टार्टअप और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालना समय की मांग है।क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ0 जी. एस. मोदी ने कहा कि तकनीकी, स्किल डेवलपमेंट, संस्कृति एवं मानव मूल्यों से जुड़े पाठ्यक्रमों को प्रारंभिक स्तर से उच्च शिक्षा तक समानांतर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने हर जिले में ओडीओपी-ओडीओसी मॉडल की तर्ज पर ही वन डिस्ट्रिक-वन स्किल विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे स्थानीय युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिले। बैठक में यह साझा निष्कर्ष निकला कि शिक्षा को नीति से निकलकर प्रयोगशाला, कक्षा और कार्यस्थल तक पहुंचाना ही विकसित भारत @2047 की कुंजी है।इस अवसर पर संयुक्त निदेशक व्यावसायिक शिक्षा विनोद कुमार बाजपेयी, क्षेत्रीय निदेशक इग्नू डा0 अजय वर्धन आचार्य, उप शिक्षा निदेशक संस्कृत शीलेन्द्र कुमार, डीआईओएस कासगंज जगदीश शुक्ला, बीएसए राकेश कुमार, राजन सिंह, शंकर सिंह, प्रतीक कुमार, फैजान, आयुषी सिंह, चन्द्र प्रकाश, तुषार शर्मा, राजेश गौतम, उमेश चन्द्र सहित बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।

JNS News 24

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