हैंड्स फॉर हेल्प सामाजिक संस्था बनी दीक्षा कुमारी की शिक्षा का सहारा, आर्थिक अभाव अब नहीं बनेगा पढ़ाई में बाधा
दीक्षा ने विश्वास के साथ कहा कि "मैं पढ़-लिखकर अपनी माँ के जीवन के कठिन दिनों को बदलना चाहती हूँ

अलीगढ़। समाज में ऐसे अनेक बच्चे हैं जिनके सपने आर्थिक अभावों के कारण अधूरे रह जाते हैं, लेकिन हैंड्स फॉर हेल्प सामाजिक संस्था, अलीगढ़ निरंतर ऐसे बच्चों के भविष्य को संवारने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में खैर रोड स्थित लाल मस्जिद के पास रहने वाली दीक्षा कुमारी (कक्षा 4) की शिक्षा का दायित्व संस्था ने अपने हाथों में लिया है। दीक्षा के पिता का निधन हो चुका है। परिवार की जिम्मेदारी उनकी माँ पर है, जिनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। परिवार किराए के मकान में रहता है और आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। दीक्षा का छोटा भाई सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित है, जिससे परिवार की परेशानियाँ और भी बढ़ जाती हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद दीक्षा के मन में पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का अटूट संकल्प है। बच्ची की लगन और परिस्थितियों को देखते हुए संस्था ने तत्काल प्रभाव से उसकी पुस्तकें एवं अन्य आवश्यक पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई तथा उसकी विद्यालय की फीस और शिक्षा से जुड़े आवश्यक खर्चों का दायित्व उठाने का निर्णय लिया। जब संस्था की टीम ने दीक्षा से बातचीत की, तो उसकी सकारात्मक सोच ने सभी का हृदय छू लिया। दीक्षा ने विश्वास के साथ कहा कि “मैं पढ़-लिखकर अपनी माँ के जीवन के कठिन दिनों को बदलना चाहती हूँ।” उसके ये शब्द टीम के लिए प्रेरणा बन गए और सभी ने उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। संस्था के अध्यक्ष सुनील कुमार ने कहा कि शिक्षा किसी भी बच्चे का अधिकार है और आर्थिक तंगी उसके सपनों के बीच कभी दीवार नहीं बननी चाहिए। संस्था का प्रयास रहेगा कि ऐसे प्रत्येक जरूरतमंद और मेधावी बच्चे तक यथासंभव सहायता पहुँचाई जाए, ताकि वह आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ सके। हैंड्स फॉर हेल्प सामाजिक संस्था का मानना है कि यदि समाज मिलकर एक बच्चे की शिक्षा का हाथ थाम ले, तो वह बच्चा भविष्य में पूरे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखता है।



