भारत इजराइल से डेढ़ सौ गुना बढ़ा है. इज़राइल जब बना था. तब इज़राइल के पास कुछ भी नहीं था. ना खेती करने के लिए सही जमीन थी.
भारत में कई टन अनाज स्टोरेज में सड़ जाता खराब हो जाता है. लेकिन इज़राइल ने अनाज स्टोर करने के लिए अलग तरह के बॉक्स बनाए हैं.

साल 1948 में इज़राइल एक देश के तौर पर अस्तित्व में आया था. मिडिल ईस्ट में बसा यह देश क्षेत्रफल के हिसाब से भारत के मिजोरम राज्य जितना है. क्षेत्रफल के मामले में भारत इजराइल से डेढ़ सौ गुना बढ़ा है. इज़राइल जब बना था. तब इज़राइल के पास कुछ भी नहीं था. ना खेती करने के लिए सही जमीन थी. ना ही कोई तकनीक. लेकिन दशकों के बाद अब इजरायल खेती की तकनीक के मामले में दुनिया के बड़े देशों को पछाड़ रहा है. इजरायल की तकनीक दुनिया के कई देश फॉलो कर रहे हैं. चलिए जानते हैं खेती की तकनीक के मामले में क्यों है इजराइल नंबर 1. पिछले कुछ दशकों में खेती की तकनीक के मामले में इज़राइल की तरक्की बेमिसाल है. इसराइल ने खेती के लिए ऐसी तकनीकें ईजाद की हैं जिसे अब पूरी दुनिया आजमा रही है. इजराइल में सिंचाई के लिए अलग तरीके की तकनीक इस्तेमाल की जाती है. पानी की ड्रिप का अलग तरह से इस्तेमाल किया जाता है. जिससे फसल की उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है. किसान एक साल में तीन फसल उगा लेते हैं. इस तकनीक से पानी भी बर्बाद नहीं होता. और खेत के हर हिस्से में पर्याप्त सिंचाई हो जाती है.
अनाज स्टोरेज होता है अलग तरह से अक्सर भारत में कई टन अनाज स्टोरेज में सड़ जाता खराब हो जाता है. लेकिन इज़राइल ने अनाज स्टोर करने के लिए अलग तरह के बॉक्स बनाए हैं. जहां न तो अनाज में खराब होता है. और साथ ही यह हवा और पानी से भी दूर रहता है. दुनिया के कई और देश इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.
कीटों में फर्क करने वाली कीटनाशक
इज़राइल ने एक ऐसी कीट नसक दवाई बनाई है. जो फसल के लिए जरूरी और फसल के लिए खतरनाक कीटों में फर्क कर लेती है. यह उन कीटों फसल से दूर रखती है. जो फसल के लिए खराब होते हैं. तो वहीं पॉलिनेशन के लिए जो भौरें होते हैं. उन्हें इस दवाई से नुकसान नहीं होता. इस दवाई से स्ट्रॉबेरी की खेती में खूब बढ़ोतरी हुई है.
खेती के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
इज़राइल के कृषि वैज्ञानिकों ने खेती के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया है. इस सॉफ्टवेयर के जरिए किस घर बैठे ही खेती से जुड़ी नई-नई तकनीक है जान लेते हैं. तो वहीं उन्हें कोई समस्या आती है तो इस सॉफ्टवेयर के जरिए उसका भी समाधान हो जाता है.