एएमयू में सुसाइड प्रिवेंशन जागरूकता मार्च
छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक, वीसी ने कहा—परेशानी में छात्र को अकेला न छोड़ें

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या की रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान के तहत गुरुवार, 10 सितंबर को मनोविज्ञान विभाग की ओर से बाब-ए-सैयद गेट पर सुसाइड प्रिवेंशन जागरूकता मार्च का आयोजन किया गया। मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं काउंसलर्स ने भाग लेकर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।मार्च के दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून ने छात्रों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि आत्महत्या किसी एक दिन का लिया गया फैसला नहीं होती, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रही मानसिक एवं भावनात्मक परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे समय में छात्रों को डांटने के बजाय उनकी बात समझना और उन्हें भावनात्मक सहयोग देना बेहद जरूरी है।
केवल पढ़ाई का दबाव नहीं होती वजह
कुलपति ने कहा कि आत्महत्या के हर मामले के पीछे केवल पढ़ाई का दबाव जिम्मेदार नहीं होता। विश्वविद्यालय में सामने आए चार मामलों की गहराई से जांच के दौरान पारिवारिक समस्याओं, आपसी रिश्तों और निजी जीवन से जुड़े तनाव जैसी विभिन्न वजहें सामने आईं।उन्होंने कहा कि कई बार बच्चा परेशानी के संकेत देता है, लेकिन परिवार में उसे डांट दिया जाता है। इससे समस्या कम होने के बजाय और गंभीर हो सकती है। जरूरत इस बात की है कि बच्चे की स्थिति को समझते हुए उसे भरोसे और सहयोग का माहौल दिया जाए।
अकेले रहने वाले छात्र को साथ जोड़ना जरूरी
प्रोफेसर नईमा खातून ने कहा कि एएमयू का हॉस्टल कल्चर एक परिवार की तरह है। यदि कोई छात्र किसी परेशानी से गुजर रहा है तो साथी छात्रों को उसकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो छात्र अकेला रहता है, उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि उसे अपने साथ जोड़कर अपनापन देना चाहिए।उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल सहानुभूति ही नहीं, बल्कि समानुभूति, समझ और साथ की आवश्यकता होती है।
दोस्त के व्यवहार में बदलाव दिखे तो करें बातचीत
मार्च में शामिल छात्रा उज्मा फातिमा ने कहा कि छोटी-छोटी बातों को समझना बेहद जरूरी है। यदि किसी दोस्त के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उससे बातचीत करनी चाहिए और उसकी परेशानी को समझने का प्रयास करना चाहिए।छात्र काउंसलर मोहम्मद नासिर मलिक ने कहा कि कई बार दोस्त ही एक-दूसरे की परेशानियों को समझ नहीं पाते। ऐसे में छात्रों को एक-दूसरे की परिस्थितियों को समझने और उनका ख्याल रखने की जरूरत है।
हर हॉस्टल में शुरू किया गया काउंसलिंग शेड्यूल
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा हॉल स्तर पर काउंसलिंग शेड्यूल शुरू किया गया है। क्लिनिकल साइकोलॉजी और साइकियाट्री यूनिट की टीमें विभिन्न हॉस्टलों में जाकर छात्रों को काउंसलिंग के लिए आमंत्रित कर रही हैं।इसके साथ ही प्रोवोस्ट और वार्डन के माध्यम से ऐसे छात्रों की पहचान की जा रही है, जिन्हें सामाजिक एवं भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य है कि छात्रों तक समय रहते सहायता, काउंसलिंग और जरूरी सामाजिक सहयोग पहुंचाया जा सके।



