अलीगढ़

डीएम के सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, झोलाछापों पर कार्रवाई तेज

44 अवैध चिकित्सा इकाइयां बंद, 4 के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित

अलीगढ़ : जिले में अवैध रूप से संचालित चिकित्सा इकाइयों, झोलाछाप चिकित्सकों और मानकों की अनदेखी कर रहे निजी अस्पतालों के मामले को जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 नीरज त्यागी से विस्तृत आख्या तलब की। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए अभियान को और तेज करने की बात कही है।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 नीरज त्यागी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जिले में निजी चिकित्सालयों एवं नर्सिंग होम के पंजीकरण एवं नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की जाती है। आवेदन प्राप्त होने के बाद चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की शैक्षिक योग्यता, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, प्रदूषण एवं फायर एनओसी सहित सभी आवश्यक अभिलेखों की जांच की जाती है। इसके साथ ही संबंधित चिकित्सा इकाई का स्थलीय निरीक्षण और भौतिक सत्यापन भी कराया जाता है। सभी मानक पूरे होने पर ही क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण अथवा नवीनीकरण जारी किया जाता है।सीएमओ ने बताया कि विभागीय नोडल अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। 1 मई 2025 से अप्रैल 2026 तक 50 बेड से कम क्षमता वाली पंजीकृत 359 चिकित्सा इकाइयों में से 53 का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 3 के खिलाफ कार्रवाई की गई।इसी अवधि में 166 अपंजीकृत चिकित्सकों का निरीक्षण कर उन्हें नोटिस जारी किए गए। प्राप्त जवाबों के आधार पर 19 इकाइयों को सील कर एफआईआर की संस्तुति की गई। जांच के दौरान 15 मेडिकल स्टोर अवैध रूप से उपचार करते पाए गए, जबकि 29 इकाइयां आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग के अंतर्गत संचालित मिलीं। वहीं 18 संचालकों ने पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। नोटिस के बाद 44 अवैध चिकित्सा इकाइयों को बंद कराया गया, जबकि 4 के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत जिले में पंजीकृत 166 अल्ट्रासाउंड केंद्रों में से 79 का औचक निरीक्षण किया गया। वहीं 50 बेड से अधिक क्षमता वाले 22 पंजीकृत अस्पतालों में से 12 का निरीक्षण किया गया। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि पूर्व में प्रस्तुत आंकड़ों में हुई त्रुटि को संशोधित कर दिया गया है।जिलाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देश पर सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर झोलाछाप चिकित्सा इकाइयों को चिन्हित करने, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने कहा है कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अवैध चिकित्सा इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

JNS News 24

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