टप्पल क्षेत्र में बैनामों पर सख्ती का असर, संदिग्ध मामलों पर प्रशासन सतर्क
पारदर्शी पंजीकरण व्यवस्था से बढ़ी निगरानी, टप्पल में फर्जी बैनामों पर प्रशासन का कड़ा शिकंजा

अलीगढ़ : जेवर एयरपोर्ट के निकट स्थित टप्पल एवं आसपास के क्षेत्र में भूमि क्रय-विक्रय को लेकर प्रशासन द्वारा अपनाई गई सख्त निगरानी और पारदर्शी पंजीकरण व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है। वर्ष 2026 में बैनामों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि अनियमित एवं संदिग्ध लेन-देन पर प्रभावी अंकुश लगा है।उपनिबंधक खैर द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 4 जुलाई 2025 तक टप्पल क्षेत्र में कुल 846 विक्रय पत्र पंजीकृत हुए थे, जबकि इसी अवधि में वर्ष 2026 में यह संख्या घटकर 583 रह गई है। इनमें अकृषक श्रेणी के विक्रय पत्रों में 233 और कृषक श्रेणी में 30 की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट प्रशासनिक सतर्कता और लगातार की जा रही निगरानी का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।उप-निबंधक कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि फर्जी एवं संदिग्ध बैनामों पर रोक लगाने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है अब पैन कार्ड अनिवार्य किया गया है, जबकि पक्षकारों एवं गवाहों के आधार का बायोमेट्रिक सत्यापन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही टप्पल क्षेत्र में संपत्ति खरीदने वाले लोगों को भूमि की वास्तविक स्थिति एवं आवश्यक कानूनी पहलुओं की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति भ्रामक जानकारी के आधार पर निवेश न करे।उप-निबंधक ने बताया कि कार्यालय को टप्पल क्षेत्र के सभी बैनामों में अनियमितता अथवा फर्जीवाड़े से संबंधित कोई सामान्य सूचना प्रप्त नहीं हुई है। केवल कुछ विशेष मामलों में ही जांच की कार्यवाही की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत बैनामों को रोकने के विधिक अधिकार सीमित हैं, फिर भी उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक स्तर पर आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन का मानना है कि पारदर्शी पंजीकरण व्यवस्था, तकनीकी सत्यापन और जागरूकता के कारण भूमि लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बन रही है, जिससे वास्तविक खरीदारों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।


