समाज के हित के लिए सदैव तत्पर रहते हैं हितैषी बाबा
गुरु पूर्णिमा उत्सव पर आज आश्रम में 10 हजार से अधिक भक्तों का होगा जमावड़ा

अलीगढ़ : एक आश्रम कैसे शक्ति पुंज हो सकता है, सेवा का केंद्र हो सकता है यह देखना है तो लोधा क्षेत्र स्थित अटलपुर गांव में अटल साधना आश्रम देख सकते हैं। आश्रम के संस्थापक संत डाक्टर मनमोहन गिरी जिन्हें भक्त स्नेह से हितैषी बाबा भी कहते हैं वह भक्तों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। उनका कहना है कि संत का जीवन ही सेवा को समर्पित होना चाहिए, इसलिए भक्तों के कष्ट दूर करना, उनके मन की पीड़ा को हरना ही सबसे बड़ी भक्ति होती है। हितैषी बाबा करीब 150 करीब कन्याओं के विवाह में सहयोग कर चुके हैं। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार को आश्रम में कई राज्यों से भक्त शामिल होंगे।

डाक्टर हितैषी बाबा बीए की शिक्षा प्राप्त करने के समय ही पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री मंत्री गुलजारी लाल नंदा के सान्निध्य में आ गए थे।
उनके कृतित्व व व्यक्तित्व से इतने प्रभावित हुए कि हितैषी बाबा ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। गुलजारी लाल नंदा के कहने पर हितैषी बाबा पढ़ाई के समय ही संत बन गए। आपने पूरे देश भर का कई बार भ्रमण किया। गांवों में जाकर सनातन संस्कृति की अलख जगाई। इसके साथ लिखने और पढ़ने का क्रम जारी रहा। वर्ष 2000 के समय वो अलीगढ़ आए और उन्होंने लोधा क्षेत्र के गांव अटलपुर में आश्रम की स्थापना की। हितैषी बाबा का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को प्रभु के दर्शन करने हैं तो वह मानव सेवा शुरू कर दे। क्योंकि प्राणी मात्र में ईश्वर का वास है। इसलिए हितैषी बाबा ने लोगों की सेवा में ही अपना जीवन समर्पित कर दिया। हितैषी बाबा ने सामाजिक समरसता का भी बहुत बड़ा कार्य किया। वर्ष 1980 से वह गांव से भोजन मंगाकर उसे ही ग्रहण करते हैं। गांव के प्रत्येक परिवार से अलग अलग दिन भोजन जाता है। इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं रहता। भोजन बिना नमक, मिर्च, तेल, हल्दी की उबली दाल और चार टिक्कर (रोटी) होती है, जिसे बाबा ग्रहण करते हैं। हितैषी बाबा का कहना है आहार से ही विचार बनता है। इसलिए मनुष्य को सादा भोजन करना चाहिए। आश्रम के माध्यम से समय समय पर सेवा होती रहती है। भ्रमण पर निकले संत अक्सर बड़ी संख्या में अटल साधना आश्रम में आते रहते हैं, जिन्हें प्रसाद, फल, वस्त्र आदि दिए जाते हैं। हितैषी बाबा गरीब बेटियों की शिक्षा में भी सहयोग करते हैं। अब तक 150 गरीब बेटियों के विवाह में सहयोग भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि जो भी बेटियों के विवाह में सहयोग करता है, वो कभी भी कष्ट में नहीं रह सकता है।
इंसेट
13 से अधिक पुस्तकें हुई प्रकाशित
डाक्टर हितैषी बाबा लेखन के क्षेत्र में भी कार्य करते हैं। अटलपुर आश्रम में वह अक्सर लिखते हुए नजर आते हैं। बाबा अब तक 13 पुस्तकें लिख चुके हैं। जागो हिंदू जागो, कल्याण का मार्ग, भारतीय संस्कृति आदि पर पुस्तकें लिखी हैं। 75 वर्ष की उम्र होने के बाद भी आपकी कलम रुकती नहीं। वह सतत लिखते रहते हैं।
इंसेट
धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़ाव
डाक्टर हितैषी बाबा व्यस्त रहने के बाद भी कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वह आह्वान अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता, साधु समाज, श्री गंगा सेवा समीति आदि तमाम स्थानों से जुड़े हुए हैं। प्रकृति प्रेमी होने के चलते करीब 1000 से अधिक पौधे भी रोपित कर चुके हैं। बाबा के पास सात से अधिक आश्रम हैं, जिनमें उन्होंने बड़ी संख्या में पौधे लगाए हैं, जो आज विशाल वृक्ष के रूप में तैयार हैं और लोगों को फल व छाया दे रहे हैं।



