आरटीआई के प्रावधानों का अध्ययन कर समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराएं अधिकारी
2005 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं लंबित प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया

अलीगढ़ : मा0 राज्य सूचना आयुक्त, उत्तर प्रदेश श्री मोहम्मद नदीम की अध्यक्षता में गुरुवार को कलैक्ट्रेट सभागार में जिले के समस्त जन सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों के साथ सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं लंबित प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आरटीआई आवेदनों का समयबद्ध एवं अधिनियम के अनुरूप निस्तारण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक जन सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी की वैधानिक जिम्मेदारी है।
मा0 राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि आयोग के समक्ष लगातार बड़ी संख्या में शिकायतें एवं द्वितीय अपीलें पहुंच रही हैं, जबकि इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जिनमें संबंधित विभाग द्वारा समय से वांछित सूचना उपलब्ध करा दी जाती तो मामला आयोग तक पहुंचता ही नहीं। आयोग द्वारा किए गए डेटाबेस सर्वे में लगभग 70 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण इस आधार पर हुआ कि संबंधित आवेदक को सूचना उपलब्ध करा दी गई। इससे स्पष्ट है कि यदि जन सूचना अधिकारी निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी का गंभीरता से निर्वहन करें तो आयोग के समक्ष लंबित प्रकरणों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत मामलों में यह पाया गया कि आवेदक को न तो प्रभावी ढंग से सुना गया और न ही समय से सूचना उपलब्ध कराने की पहल की गई। द्वितीय अपील में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कई मामलों में प्रथम अपीलीय अधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों का अपेक्षित रूप से निर्वहन नहीं किया गया। उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि आरटीआई अधिनियम कोई जटिल कानून नहीं है। प्रत्येक जन सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी को अधिनियम के प्रावधानों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।
अधिकारियों को दी स्पष्ट नसीहत:
मा0 राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि आरटीआई अधिनियम वर्ष 2005 से प्रभावी है और जब तक यह कानून अस्तित्व में है, कोई भी अधिकारी इसके प्रावधानों से स्वयं को अलग नहीं रख सकता। अधिनियम की जानकारी के अभाव में एक ओर जहां आवेदकों को अनावश्यक परेशानी होती है, वहीं दूसरी ओर अधूरी अथवा गलत सूचना देने के कारण जन सूचना अधिकारियों को भी दंड का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 314 अधिकारियों पर अर्थदंड अधिरोपित किया जा चुका है, जिसकी वसूली की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही जिले से संबंधित 264 द्वितीय अपील के मामले आयोग में दर्ज हैं, जिनकी सुनवाई आयोग द्वारा की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि वे आरटीआई अधिनियम का ठीक से अध्ययन कर समयबद्ध तरीके से आवेदनों का निस्तारण करेंगे तो न केवल आवेदकों को राहत मिलेगी, बल्कि आयोग में लंबित प्रकरणों और अधिकारियों पर अधिरोपित होने वाले अर्थदंड में भी कमी आएगी।
द्वितीय अपील और शिकायत का अंतर समझना जरूरी:
बैठक में मा0 राज्य सूचना आयुक्त ने जन सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों की आरटीआई संबंधी व्यावहारिक समझ भी परखी। उन्होंने द्वितीय अपील एवं शिकायत के बीच अंतर, विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मांगी गई सूचनाओं, आवेदन विभाग से संबंधित न होने की स्थिति में की जाने वाली कार्यवाही और एक ही आवेदन में एक से अधिक सूचनाएं मांगे जाने की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में सवाल किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक प्रकरण में अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप् ही कार्यवाही सुनिष्चित की जाए।
विभागवार लंबित प्रकरणों की समीक्षा:
बैठक में बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार, जिला पंचायतीराज, सूचना, नगर निगम एवं पुलिस विभाग से संबंधित आयोग में लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा की गई। पुलिस विभाग द्वारा आरटीआई प्रकरणों के समुचित रखरखाव एवं मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की सराहना की गई। मा0 राज्य सूचना आयुक्त ने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे आरटीआई आवेदनों को सामान्य पत्राचार न मानते हुए इसे विधिक दायित्व के रूप में लें और प्रत्येक आवेदन का समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण एवं पूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आरटीआई अधिनियम का अध्ययन, समयबद्ध सूचना और जवाबदेही-यही आयोग में अनावश्यक अपील एवं शिकायतों की संख्या कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रमोद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि मा0 राज्य सूचना आयुक्त द्वारा दिए गये निर्देशों एवं मार्गदर्शन का जिले में अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की मूल भावना- पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नागरिकों को समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने को और अधिक प्रभावी ढ़ंग से क्रियान्वित किया जाएगा।
बैठक में अपर जिलाधिकारी न्यायिक अनिल कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल गुप्ता समेत जिले के प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं जनसूचना अधिकारी उपस्थित रहे।



