हर गौआश्रय स्थल पर हरा चारा, वृक्षारोपण और बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों
राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निराश्रित गौवंश संरक्षण की समीक्षा, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

अलीगढ़ : मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को कलैक्ट्रेट सभागार में राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और निराश्रित गौवंश संरक्षण एवं भरण-पोषण के लिए गठित जिला स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में गौ संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं, निर्माणाधीन गौआश्रय स्थलों, सहभागिता योजना और राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप सभी गौआश्रय स्थलों पर गौवंशों के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा, स्वच्छ पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौआश्रय स्थलों का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित रें, जिससे गौवंशों के संरक्षण एवं संवर्धन की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद में वर्तमान में 32,761 निराश्रित गौवंश विभिन्न गौआश्रय स्थलों में संरक्षित हैं शासन के निर्देशानुसार सभी गौआश्रय स्थलों पर व्यापक वृक्षारोपण कराया जाएगा, जिसके लिए गड्ढा खोदकर पौधों की संख्या चिन्हित कर ली गई है। उन्होंने बताया कि जनपद के सभी 66 संबद्ध गौआश्रय स्थलों पर हरे चारे की बुवाई सुनिश्चित कराई जा रही है, ताकि गौवंशों को पर्याप्त पौष्टिक आहार उपलब्ध हो सके। जिन स्थानों पर हरा चारा उपलब्ध नहीं है, वहां साइलेज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मानक के अनुरूप दाना उपलब्ध कराने पर भी विशेष बल दिया गया।बैठक में निर्माणाधीन वृहद गौआश्रय केंद्रों की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि दो नए वृहद गौआश्रय स्थलों के निर्माण पर्ण होने के बाद जनपद की प्रत्येक तहसील में एक वृहद गौआश्रय स्थल उपलब्ध होगा, जिससे निराश्रित गौवंशों के संरक्षण की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। सहभागिता योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि गत माह जनपद के सभी विकास खंडों में 73 गौवंश किसानों को सुपुर्द किए गए। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्र के गौआश्रय स्थलों का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की निरंतर समीक्षा करें और किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।बैठक में गौशालाओं के विकास के लिए उपलब्ध पूलिंग धनराशि का प्रभावी उपयोग करने पर भी जोर दिया गया बताया गया कि इस धनराशि का उपयोग गौआश्रय स्थलों में शेड, बाउंड्रीवाल, लडॉउनी प्लेटफॉर्म, फेंसिंग एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण में किया जा सकता है। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को भी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए, जिससे व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन की समीक्षा के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि पशओं की डिजिटल पहचान बनाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए पंचायत सहायकों को आवश्यक प्रपत्र समय से उपलब्ध कराए जाएं, ताकि मिशन का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
बैठक में सभी उप जिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी एवं पशु चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।



