अलीगढ़

अलीगढ़ के पिसावा थाने में पुलिस की बड़ी लापरवाही आई सामने!

4 महीने बीतने के बाद भी 6 नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर!न्याय के लिए दर-दर भटक रही पीड़ित महिला, आरोपियों पर कार्रवाई नहीं!

उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली खाकी पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। मामला अलीगढ़ के पिसावा थाने का है, जहां पिछले 4 महीने से एक बेबस महिला न्याय की भीख मांग रही है। आरोप है कि मामले में नामजद 6 आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हद तो तब हो गई जब पीड़िता को इंसाफ देने के बजाय कभी इसे प्रॉपर्टी का मामला बताकर गुमराह किया जाता है, तो कभी खुद पीड़िता पर ही झूठी एफआईआर का दबाव बनाया जाता है।अलीगढ़ का पिसावा थाना… जहां इंसाफ की उम्मीद लेकर आई एक महिला पिछले 120 दिनों से सिर्फ तारीखें और खोखले आश्वासन बटोर रही है। जनवरी के महीने में दर्ज हुई एफआईआर पर आज 4 महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस की सुई एक इंच आगे नहीं बढ़ी है।

 

“हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। सूत्रों की मानें तो पीड़ित महिला की डॉक्टरी (मेडिकल रिपोर्ट) को पुलिस दबाकर बैठी हुई है। आखिर कानून के रखवाले इस मेडिकल रिपोर्ट को क्यों छुपा रहे हैं? क्या चोटों और प्रताड़ना के इस पुख्ता सबूत को गायब कर आरोपियों को क्लीन चिट देने की तैयारी है, न्याय की गुहार लगा रही इस महिला के मामले को मोड़ने के लिए पुलिस की तरफ से हर रोज एक नई थ्योरी सामने आ रही है। कभी इस गंभीर प्रताड़ना को महज ‘प्रॉपर्टी का विवाद’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की जाती है, तो कभी पीड़ित महिला पर ही ‘झूठी एफआईआर’ (FIR) दर्ज कराने का दबाव बनाया जा रहा है। थानाध्यक्ष रेखा गोस्वामी और IO दानवीर सिंह आरोपियों पर शिकंजा कसने के बजाय, मामले की पूरी स्क्रिप्ट बदलने में जुटे हैं ताकि रसूखदारों को बचाया जा सके।
क्या है पिसावा पुलिस की इस ढुलमुल कार्यशैली के पीछे का सच?

JNS News 24

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