मंडल में 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक उपलब्ध, कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के निर्देश
किसानों को निर्धारित दरों पर मिलेगा उर्वरक, उपलब्धता और वितरण की होगी नियमित निगरानी

अलीगढ़ किसानों को रबी फसलों की बुवाई के लिए उर्वरकों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आयुक्त अलीगढ़ मंडल ओपी आर्य ने संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ कमिश्नरी कार्यालय में बैठक कर उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडल के सभी बिक्री केंद्रों पर उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखी जाए और दैनिक अनुश्रवण एवं समीक्षा के माध्यम से वितरण व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।बैठक में सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मंडल में बिक्री केंद्रों पर किसानों के लिए 8,081 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इसमें 4,643 मीट्रिक टन यूरिया, 2,743 मीट्रिक टन डीएपी और 695 मीट्रिक टन एनपीके शामिल है। इसके अतिरिक्त बफर स्टॉक में 41,777 मीट्रिक टन उर्वरक सुरक्षित है, जिसमें 33,990 मीट्रिक टन यूरिया, 6,485 मीट्रिक टन डीएपी और 1,302 मीट्रिक टन एनपीके शामिल हैं। इस प्रकार बिक्री केंद्रों के स्टॉक और बफर स्टॉक को मिलाकर मंडल में कुल 49,858 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध बताया गया।
आयुक्त ने निर्देश दिए कि उर्वरकों की मांग के अनुरूप समय से आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर कृत्रिम अभाव, अनियमित वितरण अथवा कालाबाजारी की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए। बिक्री केंद्रों पर स्टॉक एवं वितरण की नियमित निगरानी करते हुए किसानों को शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। निर्धारित दरों से अधिक वसूली या वितरण में अनियमितता की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी नजदीकी सहकारी समिति अथवा निर्धारित बिक्री केंद्र पर खतौनी और आधार कार्ड लेकर जाएं और अपनी भूमि के आधार पर अनुमन्य मात्रा में उर्वरक प्राप्त करें। उर्वरकों का वितरण शासन के निर्धारित मानकों एवं दरों के अनुसार किया जाएगा।
आयुक्त ओपी आर्य ने स्पष्ट किया कि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय के साथ आपूर्ति, उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर निरंतर नजर रखें, ताकि रबी फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को उर्वरकों के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े।



