संख्या का करें शंखनाद, 14 दिसंबर को भरेंगे हुंकार
संतों और गौभक्तों ने गोमाता को राष्ट्र माता और गौहत्या पर प्रतिबंध की उठाई मांग

अलीगढ़ : गोमाता को राष्ट्र माता और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए संतों और गोभक्तों ने हुंकार भर दी है। 14 दिसम्बर को लाखों की संख्या में लखनऊ पहुंचकर गोभक्त सरकार पर गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए दवाब बनाएंगे। यदि यहां बात नहीं बनी तो फिर संत मोर्चा संभालेंगे और वह बड़ी संख्या में दिल्ली में आंदोलन करेंगे। सभी गौभक्तों ने संकल्प लिया है कि वह अब गौमाता पर हो रहे अत्याचार को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।

रविवार को सिंघारपुर स्थित केशव सेवा धाम में बड़ी संख्या में गोभक्त एकजुट हुए। यहां राजस्थान के पुष्कर से आये गोपालानंद सरस्वती महाराज ने हुंकार भरी। वह पूरे देश में गोसम्मान आह्वान अभियान के तहत गौभक्तों के बीच हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। गोपालानंद सरस्वती महाराज ने दावा किया कि यदि 2029 तक गोहत्या बंद नहीं हुई तो भारत को खंड खंड बंटने से कोई रोक नहीं सकता है, जहां जहां गोमाता पर अत्याचार हुआ उस स्थान पर हिंदुओं की संख्या घटी है। फिर आपके बच्चे डेविड और रिजवान होंगे। केरल जो आदि शंकराचार्य जी की जन्मस्थली है, आज वहां मस्जिद और चर्च नजर आते हैं। क्योंकि यहां गोमाता की रक्षा नहीं की। यही स्थिति प्रदेश के कई राज्यों की है। उन्होंने कहा कि गौहत्या के दो चरण हमने पूर्ण किए। पहले चरण में हमने पांच करोड़ हस्ताक्षर कराएं। सरकार नहीं मानी तो 90 दिन में 15 करोड़ हस्ताक्षर कराकर अपनी शक्ति प्रगट कर दी। अब 14 दिसम्बर को लाखों की संख्या में लखनऊ पहुंचकर गोभक्त हुंकार भरेंगे। जब समाज हुंकार भरता है तो राम मंदिर बन जाता है। धारा 370 समाप्त हो जाती है। फिर समाज संख्या का शंखनाद करेगा तो निश्चित तौर पर सरकार को हमारी मांग मांगनी पड़ेगी। गोपालनंद सरस्वती महाराज ने कहा कि 14 दिसम्बर को गांव से लेकर शहर तक से गोभक्त लखनऊ पहुंचेंगे। हमारी तीन मांगे हैं। इसमें पहली गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करें, गोहत्या पर प्रतिबंध लगाएं और गोपालन मंत्रालय बनाया जाए। गोमाता पशु नहीं है। यदि दिसम्बर में लखनऊ में बात नहीं बनी तो 2000 संतों के साथ दिल्ली जाकर धरने में बैठ जायेंगे। भले ही गोमाता की रक्षा के लिए प्राण त्यागने पड़े मगर बिना पूर्ण आश्वासन के धरने से उठेंगे नहीं।
वृंदावन से आए संत गोपेश्वर कृष्ण दास महाराज ने कहा कि आजादी के समय सभी क्रांतिकारी परम गोभक्त थे। इसलिए 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडेय ने गाय की चर्बी से बने कारतूस के विरोध में बिगुल फूंक दिया था। हमें अब शांत नहीं रहना है गो सम्मान आह्वान के माध्यम से हम गोमाता की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इससे पहले
पूर्णानंदपुरी महाराज ने प्रस्तावना रखी। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म ग्रंथों में गोमाता को प्रमुख स्थान दिया गया है, मगर आज भी गोमाता दुर्दशा का शिकार हो रही हैं ये हम सभी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गोपालानंद सरस्वती महाराज ने गोमाता की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। हम सभी उनके साथ हैं। अब आंदोलन तभी रोकेगा जब गोमाता को सम्मान मिलेगा। योगी विनयनाथ ने कहा कि अलीगढ़ में गांव से लेकर शहर तक घर घर हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे। इस बार पूरे देश से 30 करोड़ हस्ताक्षर कराएं जायेंगे। विभाग प्रचारक गोविन्द ने कहा कि यह विशाल अभियान है इसमें जनमानस को अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना होगा। हम सभी संतों के आह्वान के साथ हैं। राज नारायण सिंह ने कहा कि आजादी से लेकर आज तक गोमाता राष्ट्र माता घोषित नहीं हो सकी। गोहत्या पर प्रतिबंध भी नहीं लगाया गया। हमें अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना होगा। पूज्य संतों की अगुवाई में विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे। जिससे गो सम्मान आंदोलन जन आंदोलन बन सके। आजाद नगर के नगर कार्यवाह आशु कार्यकर्ताओं के साथ व्यवस्थाएं संभाली। आरएसएस के विभाग सेवा प्रमुख मनवीर सिंह, महानगर संघचालक अजय सराफ, गोपाल वार्ष्णेय, कृष्णा गुप्ता, कविता, मनोज शर्मा, उमेश सरकोड़ा आदि थे।



