आयुर्वेद ने लौटाई सेहत की मुस्कान
मडराक राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में जीर्ण रोगों का हुआ सफल उपचार

अलीगढ़ राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से अनेक रोगी जीर्ण रोगों से राहत प्राप्त कर स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सालय में रोगियों को आयुर्वेदिक उपचार के साथ उनकी प्रकृति के अनुरूप आहार-विहार, दैनिक दिनचर्या एवं योग के महत्व की जानकारी देकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। चिकित्सालय में नियमित योग सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही आवश्यकता अनुसार आयुर्वेदिक औषधियों एवं पंचकर्म चिकित्सा का लाभ भी रोगियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मडराक में उपचार प्राप्त करने वाले रोगियों की सफलता की कहानियां आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा रही हैं।

14 एमएम की पथरी से मिली राहत:मडराक निवासी 54 वर्षीय भूरी सिंह लंबे समय से 14 एमएम की किडनी स्टोन (वृक्क अश्मरी) के कारण तीव्र पार्श्व शूल से पीड़ित थे। विभिन्न स्थानों पर उपचार कराने के बावजूद उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मडराक में परामर्श लिया। चिकित्सकों द्वारा आयुर्वेदिक औषधियों के साथ आचार्य सुश्रुत द्वारा वर्णित विद्धकर्म चिकित्सा निर्धारित अंतराल पर प्रदान की गई। चिकित्सकों के अनुसार लगभग डेढ़ माह के उपचार के उपरांत पथरी निकल गई और रोगी को उल्लेखनीय राहत मिली। वर्तमान में रोगी स्वस्थ है। भविष्य में पथरी की पुनरावृत्ति की संभावना कम करने के उद्देश्य से उन्हें संतुलित आहार-विहार एवं नियमित दिनचर्या अपनाने की भी सलाह दी गई।
पक्षाघात से उबरकर फिर सामान्य जीवन की ओर: अकराबाद निवासी 57 वर्षीय पवन कुमार पिछले तीन माह से पक्षाघात से पीड़ित थे। उनके शरीर का बायां हिस्सा प्रभावित था और चलने-फिरने में भी कठिनाई हो रही थी। परिजनों के अनुसार उन्हें सहारा देकर चिकित्सालय लाना पड़ता था। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मडराक में चिकित्सकीय परामर्श के बाद आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म चिकित्सा (पत्र पिंड स्वेद एवं नस्य), अग्निकर्म और विद्धकर्म का समन्वित उपचार किया गया। साथ ही उनकी प्रकृति के अनुरूप आहार-विहार एवं नियमित योगाभ्यास की सलाह दी गई।

चिकित्सकों के अनुसार उपचार के दौरान उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वर्तमान में वे सामान्य दैनिक गतिविधियां करने में सक्षम हैं। चिकित्सालय की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. काजल शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर रोगों की पुनरावृत्ति रोकने पर भी विशेष बल देता है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ0 नरेन्द्र कुमार का कहना है कि आयुर्वेदिक उपचार, संतुलित आहार-विहार, नियमित योग एवं पंचकर्म जैसी प्रक्रियाओं के समन्वित उपयोग से अनेक रोगियों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि वे स्वस्थ जीवन के लिए आयुष चिकित्सा पद्धति एवं योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।



