अलीगढ़

भागवत श्रवण से बड़े से बड़ा पापी भी पाता है मुक्ति : पं. खगुल कृष्ण भारद्वाज

श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा श्रवण किया

अलीगढ़। जीटी रोड स्थित सुप्रसिद्ध श्री वार्ष्णेय मंदिर में अंतर्राष्ट्रीय वैश्य संगठन (रजिस्टर्ड) महानगर युवा एवं महिला सभा के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा श्रवण किया। श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक प्रवक्ता पंडित खगुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने अपनी सुमधुर वाणी से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान का अमृतपान कराया।कथा के दौरान महाराज श्री ने आत्मदेव, गोकर्ण एवं धुन्धुकारी की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि आत्मदेव नामक ब्राह्मण संतान न होने के कारण अत्यंत दुःखी था। संन्यासी द्वारा दिए गए फल के प्रभाव से गाय के गर्भ से गोकर्ण का जन्म हुआ, जबकि धुन्धुली की बहन का पुत्र धुन्धुकारी कहलाया। गोकर्ण धर्मात्मा और ज्ञानी बने, जबकि धुन्धुकारी दुष्ट प्रवृत्ति का निकला। उसके अत्याचारों से माता-पिता दुखी हो गए और अंततः वेश्याओं ने धन के लोभ में उसकी हत्या कर दी, जिससे वह प्रेत योनि में चला गया।

 

महाराज श्री ने बताया कि अपने भाई की मुक्ति के लिए गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा का आयोजन किया। श्रद्धा और भक्ति के साथ कथा श्रवण करने से धुन्धुकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति मिली और उसे दिव्य लोक की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि सत्संग, भक्ति और भागवत श्रवण से बड़े से बड़ा पापी भी उद्धार प्राप्त कर सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने महाभारत प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि हस्तिनापुर के राजसिंहासन को लेकर पाण्डवों और कौरवों के बीच संघर्ष हुआ। दुर्योधन ने छलपूर्वक पाण्डवों का राज्य हड़प लिया तथा द्रौपदी का अपमान किया। शांति के सभी प्रयास विफल होने पर कुरुक्षेत्र का महायुद्ध हुआ, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश दिया। अठारह दिनों तक चले युद्ध में अधर्म का नाश हुआ और धर्म की विजय हुई। अंततः पाण्डवों ने भगवान की शरण ग्रहण कर मोक्ष मार्ग का अनुसरण किया। उन्होंने कहा कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय धर्म की ही होती है।
धार्मिक अनुष्ठान में विशिष्ट यजमान के रूप में एडवोकेट मुकेश कुमार गुप्ता एवं मंजू गुप्ता उपस्थित रहे। वहीं आज के यजमान रवि वार्ष्णेय, रश्मि वार्ष्णेय, अरविंद वार्ष्णेय एवं अनीता वार्ष्णेय रहे।

 

कथा व्यवस्था को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने में गौ माता कृष्णा गुप्ता, प्रतिमा रानी वार्ष्णेय, नीतू वार्ष्णेय आनंद, प्रीति अग्रवाल, अनीता वार्ष्णेय, अंशु राजुल गुप्ता एवं मनीषा नक्षत्र का विशेष योगदान रहा।
इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में युवा एवं महिला सभा के पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवा सभा के महानगर अध्यक्ष विशाल वार्ष्णेय आनंद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष डिब्बा, मनोज गुप्ता, उपाध्यक्ष संदीप नक्षत्र, अमित अग्रवाल, अनुज वार्ष्णेय, मोहित वार्ष्णेय, महामंत्री राकेश गुप्ता लीडर, नीरज वार्ष्णेय, अमित गोयल, अर्पित बंसल, पीयूष गुप्ता (एलआईसी), कृष्ण वार्ष्णेय, राहुल गुप्ता एवं अक्षय गुप्ता सहित महिला सभा की अध्यक्ष वर्षा वार्ष्णेय, पायल साईं, राम वार्ष्णेय, आशा रानी, नीतू वार्ष्णेय आनंद, मनोज सेल्फी, मनीषा वार्ष्णेय एवं ममता गुप्ता तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

JNS News 24

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