हर बूंद बने भविष्य की पूंजी: वर्षा जल संचयन को जनआंदोलन बनाने का समय
एडीए के मानकों का पालन करें, रेनवाटर हार्वेस्टिंग अपनाएं, भूजल बचाएं

अलीगढ़ लगातार घटते भूजल स्तर, बढ़ती जल मांग और बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य के बीच रेनवाटर हार्वेस्टिंग अब केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। हाल ही में शहर में वर्षा जल संचयन व्यवस्थाओं की स्थिति तथा नगर आयुक्त के नेतृत्व में नगर निगम द्वारा नए रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए जाने की दिशा में उठाए गए कदम यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि जल संरक्षण को अब व्यवहारिक रूप से लागू करने का समय आ गया हैअलीगढ़ विकास प्राधिकरण के सचिव राहुल विश्वकर्मा ने कहना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक, संस्थान, व्यवसायिक प्रतिष्ठान एवं भवन स्वामी की साझा जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक भवन अपनी छत पर गिरने वाले वर्षा जल को भूमि में रिचार्ज करने की व्यवस्था सुनिश्चित कर दे, तो भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार संभव है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के भवन निर्माण उपविधियों के अनुसार 300 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले आवासीय एवं व्यवसायिक भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना अनिवार्य है। भवन स्वामी को निर्माण पूर्ण होने से पूर्व इस व्यवस्था को विकसित करना आवश्यक है। यह प्रावधान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जल भविष्य की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है।
एडीए सचिव राहुल विश्वकर्मा ने बताया कि अलीगढ़ विकास प्राधिकरण द्वारा भूजल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 300 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखण्डों पर स्वीकृत मानचित्रों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रुप हाउसिंग, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं विद्यालयों के स्वीकृत मानचित्रों में नियमानुसार रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली पूर्ण होने के बाद ही जमा/बंधक एफडीआर का भुगतान किया जाता है। साथ ही ऐसे भवनों की जोनवार सूची तैयार की जा रही है, जिनकी एफडीआर लंबे समय से जमा है, लेकिन वापसी के लिए आवेदन नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि जनहित में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाने के लिए आगामी प्राधिकरण बोर्ड बैठक में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता की सीमा 300 वर्गमीटर से घटाकर 200 वर्गमीटर किए जाने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त विशेष अभियान चलाकर नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है और निर्धारित क्षेत्रफल वाले स्वीकृत भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के निर्माण एवं उसकी कार्यात्मकता की निरंतर जांच भी कराई जा रही है।
सचिव विश्वकर्मा ने बताया कि विगत वर्षों में एडीए द्वारा विभिन्न भवनों का निरीक्षण कराया गया, जिनमें अनेक स्थानों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली या तो स्थापित नहीं मिली अथवा स्थापित होने के बावजूद संचालित नहीं पाई गई। ऐसे मामलों में संबंधित भवन स्वामियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण भविष्य में भी नियमित निरीक्षण अभियान चलाकर रेनवाटर हार्वेस्टिंग की प्रभावी कार्यशीलता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा शहर के प्रमुख क्षेत्रों में नए वर्षा जल संचयन संयंत्रों की स्थापना की पहल अत्यंत सराहनीय है। ऐसे प्रयास भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देंगे, हैंडपंपों एवं नलकूपों के जलस्तर में सुधार लाएंगे और बरसात के पानी को व्यर्थ बहने से रोकेंगे। यदि विभिन्न सरकारी विभाग, निजी संस्थान और आम नागरिक इस दिशा में समन्वित प्रयास करें तो अलीगढ़ जल संरक्षण का एक सफल मॉडल बन सकता है।
राहुल विश्वकर्मा ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि वर्षा का अधिकांश पानी नालों के माध्यम से शहर से बाहर निकल जाता है, जबकि यही जल यदि वैज्ञानिक तरीके से भूमि में पहुंचाया जाए तो सूखते जलस्रोतों को नया जीवन मिल सकता है। वर्षा जल संचयन से न केवल भूजल स्तर सुधरता है, बल्कि जलभराव की समस्या में कमी आती है, पेयजल संकट कम होता है और पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होता है। उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक भवन स्वामी अपने परिसर में स्थापित रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की नियमित सफाई, रखरखाव एवं संचालन सुनिश्चित करें। जिन भवनों में यह व्यवस्था नहीं है, वे शीघ्र इसे स्थापित कर जल संरक्षण के इस अभियान में सहभागी बनें। सचिव ने कहा कि ष्जल है तो कल हैष् केवल एक नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। यदि आज प्रत्येक नागरिक वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने का संकल्प ले, तो भविष्य में जल संकट की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में वर्षा जल संचयन सबसे सरल, प्रभावी और स्थायी उपाय है।



