अलीगढ़

केंद्र सरकार के 12 वर्ष और प्रदेश सरकार के 9 वर्ष होने पर किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का हुआ आयोजन

प्राकृतिक खेती अपनाकर सुरक्षित करें मिट्टी, जल और मानव स्वास्थ्य -विशेषज्ञ

अलीगढ़ : केंद्र सरकार के 12 वर्ष और प्रदेश सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, छेरत में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मा0 अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती विजय सिंह एवं जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण पाल सिंह ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उपनिदेशक कृषि अरुण कुमार चौधरी एवं जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार चौधरी ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मा0 अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती विजय सिंह ने “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसधान” का उद्घोष करते हुए कहा कि किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसी गोष्ठियां अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने किसानों से खेती के साथ-साथ गौपालन अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके समृद्ध होने से ही राष्ट्र की उन्नति संभव है।मा0 सदस्य उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग श्रीमती मीना कुमारी ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर कम्पोस्ट एवं जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता को बढ़ाती है बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का आधार भी बनती है।कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिक डॉ. विश्वजीत सिंह ने आलू की खेती एवं टिश्यू कल्चर तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी उन्होंने बताया कि टिश्यू कल्चर एक वैज्ञानिक पद्धति है, जिसके माध्यम से एक पौधे से लगभग 1700 नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने केंचुआ खाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रासायनिक खेती और अत्यधिक यंत्रीकरण से भूमि के मित्र केंचुओं की संख्या कम हो रही है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।प्राकृतिक खेती विषय पर वैज्ञानिक डॉ0 नेत्रपाल मलिक ने बताया कि प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवों पर आधारित खेती है उन्होंने कहा कि जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक संसाधन पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं और मिट्टी की जैविक सक्रियता को बढ़ाते हैं। यह खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उत्पादन लागत को भी कम करती है।मा0 एमएलसी, पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद प्रो0 तारिक मंसूर ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का किसान विकसित और आत्मनिर्भर होगा। उन्होंने जल संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी भारत में निवास करती है, जबकि शुद्ध पेयजल कीउपलब्धता मात्र 4 प्रतिशत है। उन्होंने नदियों के संरक्षण एवं रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अपनाने का आह्वान किया।मा0 एमएलसी डॉ. मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि बदलती जीवनशैली और रासायनिक खेती के दुष्परिणामों के कारण गंभीर बीमारियों, विशेषकर कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। भूमि की उर्वरता घट रही है और मौसम चक्र में असंतुलन उत्पन्न हो रहा है उन्होंने किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने का आग्रह किया।जिलाध्यक्ष श्री कृष्णपाल सिंह ने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बीते वर्षों में कृषि उत्पादन मेंवृद्धि के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग भी लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिसके कारण खाद्यान्न की गुणवत्ता एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता बन गई है।संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार ने “अब लौट चलें, प्रकृति की ओर” का संदेश देते हुए कहा कि किसानों को वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए मानकों के अनुरूप खेती करनी चाहिए उन्होंने मिट्टी परीक्षण कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने, कम पानी वाली फसलों को अपनाने तथा रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते प्रभाव के कारण मौसम चक्र प्रभावित हो रहा है, इसलिए पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की मांग है। उन्होंने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती तथा मोटे अनाज (मिलेट्स) के उत्पादन एवं उपभोग को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।एफपीओ संचालक संतोष कुमार सिंह ने कहा कि किसानों को यह समझने की आवश्यकता है कि सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देनेके लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम क्यों आयोजित कर रही है। उन्होंने किसानों से बदलते कृषि परिदृश्य को समझते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।कार्यक्रम के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, जैविक खादों के उपयोग, गौ-आधारित कृषि एवं टिकाऊ खेती की नवीन तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ किसान आय बढ़ाने केउपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष ई0 राजीव शर्मा, शिव नारायण शर्मा, ब्लॉक प्रमुख जवां हरेंद्र सिंह, चौधरी नत्थी सिंह, शल्य राज सिंह, गौरव शर्मा, अवध प्रकाश सिंह, मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार सहित कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

JNS News 24

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