हुनर को लगे पंख : मिट्टी के बर्तनों से गोबर के लक्कड़ तक राहुल कुमार ने रचा नवाचार
माटी कला बोर्ड के सहयोग से शहरी मदनगढ़ी के राहुल कुमार ने स्थापित किया अनोखा स्टार्टअप

अलीगढ़ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारंपरिक कला एवं कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित योजनाएं युवाओं के हुनर को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसका उदाहरण शहरी मदनगढ़ी गांव निवासी राहुल कुमार ने प्रस्तुत किया है। माटी कला बोर्ड के सहयोग से राहुल कुमार ने अपनी फैक्ट्री स्थापित कर पारंपरिक माटी कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए अपने लिए रोजगार का नया अवसर तैयार किया है।राहुल कुमार की इकाई में मिट्टी से 19 से अधिक प्रकार के आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।इनमें मिट्टी का प्रेशर कुकर, तवा, कड़ाही, डिनर सेट, पानी की इको-फ्रेंडली बोतलें, गिलास, चाउमीन प्लेट एवं लस्सी के गिलास सहित विभिन्न उत्पाद शामिल हैं। पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों को आधुनिक उपयोग के अनुरूप तैयार कर उन्होंने माटी कला को नई पहचान देने का प्रयास किया है।राहुल कुमार का नवाचार केवल मिट्टी के बर्तनों तक सीमित नहीं है उन्होंने मशीनों में अपनी तकनीकी समझ और प्रयोगशीलता का उपयोग करते हुए गोबर से लंबे कंडे, लट्ठे तैयार करने की तकनीक विकसित की है। पगमिल सहित अन्य मशीनों में आवश्यक बदलाव कर वे लगभग तीन-तीन फीट लंबे लट्ठे तैयार करते हैं। इन लट्ठों का उपयोग वह अपनी इकाई में मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए ईंधन के रूप में भी कर रहे हैं। इससे उत्पादन लागत को कम करने में मदद मिल रही है। राहुल द्वारा तैयार किए जा रहे गोबर के कंडों, लट्ठों की मांग बाहरी बाजारों में भी है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। इस प्रकार पारंपरिक संसाधन का उपयोग करते हुए उन्होंने अपने उत्पादन की लागत कम करने के साथ-साथ आय का एक नया माध्यम भी विकसित किया है।राहुल कुमार बताते हैं कि माटी कला बोर्ड से मिले सहयोग और मार्गदर्शन ने उनके हुनर को व्यवसाय का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इसके लिए वह उप मुख़्य कार्यपालक अधिकारी संजीदा बेगम का आभार भी जताते हैं, कि उनके मार्गदर्शन से ही ये सब सम्भव हो सका। आधुनिक मशीनों और तकनीक का उपयोग कर पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने का उनका प्रयास क्षेत्र के अन्य कारीगरों और युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। उनका यह प्रयास दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़ते हुए स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और नए रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि जब से उन्होंने परंपरागत कार्य के साथ प्रदेश सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं का लाभ उठाया है तब से उनकी आमदनी कई गुना बढ़ गई है।



