जैन समाज के विरुद्ध की गई कथित आपत्तिजनक एवं भ्रामक टिप्पणी को लेकर सकल जैन समाज ने जताया विरोध
जैन समाज अलीगढ़ के सदस्यों ने शासन एवं प्रशासन का ध्यान एक अत्यंत गंभीर विषय की ओर आकर्षित कराया

अलीगढ़।जैन समाज के विरुद्ध की गई कथित आपत्तिजनक एवं भ्रामक टिप्पणी के संबंध में उचित कार्यवाही हेतु सकल जैन समाज अलीगढ़ के सदस्यों ने शासन एवं प्रशासन का ध्यान एक अत्यंत गंभीर विषय की ओर आकर्षित कराया है।श्री दिगम्बर जैन महासमिति के प्रांतीय महामंत्री ने बताया कि 21 मई को समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई द्वारा एक प्रश्न के जवाब में कहा कि भारत से मांस का निर्यात करने वाली शीर्ष 20 कंपनियों में 18 जैन समुदाय के लोगो की है।जैन समाज के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक,असत्य एवं भ्रामक टिप्पणियां की गईं,जिससे देशभर के जैन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।जैन समाज सदैव अहिंसा,सत्य,सद्भावना एवं राष्ट्रहित के मूल्यों का पालन करता आया है तथा देश की आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।इतना ही नहीं भारत के कुल टैक्स का 24% जैन समाज द्वारा जमा होता है।इस दौरान प्रांतीय संयोजक मुनेश जैन ने कहा कि किसी भी समाज के विरुद्ध बिना तथ्य एवं प्रमाण के लगाए गए आरोप सामाजिक सौहार्द एवं आपसी भाईचारे को प्रभावित करते हैं अतः ऐसी टिप्पणियां न केवल जैन समाज का अपमान हैं, बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने का भी कार्य करती हैं।प्रांतीय मीडिया प्रभारी मयंक जैन ने कहा कि जैन समाज के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए और यदि आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं तो संबंधित व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से जैन समाज से बिना शर्त क्षमा याचना की जाए।धार्मिक अथवा सामाजिक समुदाय के विरुद्ध इस प्रकार की भ्रामक एवं अपमानजनक टिप्पणियां करने वालों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।इसके अलावा सामाजिक सौहार्द एवं धार्मिक सम्मान बनाए रखने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।अतः शासन, प्रशासन से विनम्र अनुरोध है कि उक्त प्रकरण का संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही करने का कष्ट करें,जिससे जैन समाज की भावनाओं का सम्मान हो तथा समाज में सौहार्द एवं शांति बनी रहे क्योंकि अहिंसा, सत्य एवं सद्भावना जैन धर्म की पहचान है।



