गुल्लक टूटी तो सामने आई मानवता की मिसाल,आयशा,आलिया और अशमा फातिमा ने हेल्पलेस पेशेंट केयर सेंटर को दान की अपनी पूरी बचत
बच्चियों द्वारा दान की गई राशि लगभग ₹11,406

अलीगढ़, किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि संवेदनशील दिल चाहिए। इसी भावना की खूबसूरत मिसाल पेश करते हुए जे.एन.मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ के हृदय रोग एवं हृदय शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ प्रोफेसर आजम हसीन की बेटियों आलिया फातिमा,आयशा फातिमा और अशमा फातिमा ने अपनी गुल्क फोड़कर जमा की गई अपनी पूरी बचत हैंडस फॉर हैल्प सामाजिक संस्था द्वारा बनाए जा रहे हेल्पलेस पेशेंट केयर सेंटर के लिए दान कर दी।बच्चियों द्वारा दान की गई राशि लगभग ₹11,406 है। इस सोच के पीछे छिपी भावना बेहद बड़ी है। मानवीय कार्य हेतु लम्बे से बचाए गए पैसों को जरूरतमंद रोगियों की सेवा के लिए समर्पित कर इन बेटियों ने यह संदेश दिया कि मानव सेवा के लिए उम्र नहीं, संस्कार और बड़ा दिल चाहिए।जैसे पिता, वैसे बेटियां प्रोफेसर आजम हसीन स्वयं लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित जरूरतमंद मरीजों की सेवा में समर्पित हैं। जे.एन. मेडिकल कॉलेज,अलीगढ़ में अपनी टीम के साथ उन्होंने हजारों हृदय रोगियों की हृदय शल्य चिकित्सा कर उनके जीवन को नई उम्मीद और नई जिंदगी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका सेवा भाव केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों के प्रति उनकी संवेदनशीलता उनके परिवार में भी दिखाई देती है। पिता के इन्हीं संस्कारों को उनकी बेटियों ने अपनी छोटी-सी गुल्लक की बचत के माध्यम से आगे बढ़ाया है। यह दृश्य केवल एक दान का नहीं, बल्कि एक परिवार में पनप रहे सेवा और मानवता के संस्कारों का दृश्य है। हैंडस फॉर हैल्प द्वारा बनाया जा रहा हेल्पलेस पेशेंट केयर सेंटर आर्थिक और सामाजिक रूप से परेशान जरूरतमंद रोगियों एवं उनके परिजनों के लिए सहयोग का माध्यम बनने का प्रयास है। ऐसे मरीज, जो उपचार के दौरान रहने, भोजन और अन्य आवश्यकताओं को लेकर परेशान होते हैं, उन्हें मानवीय सहयोग उपलब्ध कराने का संस्था का उद्देश्य है। संस्था ने प्रोफेसर आजम हसीन एवं उनकी बेटियों आयशा फातिमा, अलिया फातिमा और अशमा फातिमा का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में बदलाव हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं आता। कई बार एक छोटी-सी गुल्लक भी किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी उम्मीद बन जाती है।
समाज के लिए संदेश
“बच्चों की गुल्लक में जमा सिक्के जब किसी जरूरतमंद की जिंदगी में उम्मीद बन जाएं, तो उससे बड़ा संस्कार कोई नहीं। मदद के लिए बड़ी उम्र या बड़ी संपत्ति नहीं, बस बड़ा दिल चाहिए।”
मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।



