अलीगढ़

मण्डलीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव’’ का कमिश्नरी में हुआ भव्य आयोजन

पोल्ट्री क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, निवेश एवं रोजगार सृजन पर हुआ व्यापक विचार-विमर्श

अलीगढ़ अलीगढ़ मण्डल में पोल्ट्री उद्योग के विकास को नई दिशा प्रदान करने और पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े किसानों, उद्यमियों, विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य से मंगलवार को कमिश्नरी सभागार में एक दिवसीय ’’मण्डल स्तरीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव’’ का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में पोल्ट्री क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, रोग नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, विपणन, निवेश एवं रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। अलीगढ़ मण्डल के पोल्ट्री कॉन्क्लेव की विशेषता रही कि पोल्ट्री फॉर्म को डिजिटिलाइज्ड करने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था कराई गई, प्रशिक्षण सत्र में कोडबिज सॉल्यूशन नोएडा की श्रीमती स्वाती अग्रवाल एवं शुभम चौधरी द्वारा प्रजेंटेशन एवं सॉफ्टवेयर का डेमो दिया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ ओ पी आर्य ने पोल्ट्री क्षेत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि एवं पशुपालन के साथ-साथ पोल्ट्री उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और बेहतर प्रबंधन को अपनाकर इस क्षेत्र में किसानों एवं युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार की अनेक संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया

विशिष्ट अतिथि अपर निदेशक पशुपालन डॉ0 अनिल कुमार गहलौत ने मण्डल में पोल्ट्री उद्योग की संभावनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और किसानों एवं युवाओं की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों एवं किसानों को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कॉन्क्लेव में पशुपालन के अपर निदेशक डॉ0 हौसला प्रसाद ने पशुपालन एवं पोल्ट्री क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभागीय प्रयासों, सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं पोल्ट्री क्षेत्र न केवल पोषण सुरक्षा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वैज्ञानिक पद्धतियों, आधुनिक प्रबंधन एवं बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से इस क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में लखनऊ से आए अपर निदेशक डॉ. अनिल कुमार गहलौत, अपर निदेशक डा0 प्रमोद कुमार, डॉ0 बृजेश त्रिपाठी, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ0 पी के सिंह, मंडल के जिलों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 विजय यादव, डॉ आर के शर्मा एवं पशु चिकित्सा अधिकारी सहित मुर्गी पालन व्यवसाय में लगे पॉल्ट्री पालक एवं इच्छुक किसान भी उपस्थित रहे।

उद्यमियों ने पोल्ट्री सेक्टर में निवेश की दिखाई रुचि

कॉन्क्लेव के दौरान कई उद्यमियों ने पोल्ट्री सेक्टर में निवेश की रुचि दिखाई। कॉन्क्लेव के संयोजक एवं सीवीओ डॉ. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग में करीब 50 करोड़ रुपये पूंजी निवेश के लिए एमओयू हुआ है। पशुपालन विभाग के साथ एमओयू करने वालों में प्रतीक वार्ष्णेय, रॉबिन चौधरी, संजय तिवारी और अनुपम माहेश्वरी प्रमुख रहे। सीवीओ ने बताया कि उद्यम में लगाई जाने वाली कुल पूंजी का 30 प्रतिशत पशुपालक द्वारा लगाया जाएगा और 70 प्रतिशत बैंक से लोन लिया जाएगा और ब्याज विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

पोल्ट्री सेक्टर के प्रमुख विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉ0 प्रो0 अमिताभ भट्टाचार्य ने पोल्ट्री उत्पादन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पोल्ट्री क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कॉन्क्लेव में पोल्ट्री उद्योग से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव और विचार साझा किए। इनमें डीडीएम नाबार्ड, एलडीएम प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अपने-अपने अनुभवों एवं विशेषज्ञता के आधार पर पोल्ट्री उद्योग की विभिन्न चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है पोल्ट्री उद्योग

कॉन्क्लेव के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज पोल्ट्री उद्योग केवल अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक कृषि-आधारित उद्योग के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। इसमें गुणवत्तापूर्ण चूजों की उपलब्धता, संतुलित पोषण, वैज्ञानिक प्रबंधन, रोगों की रोकथाम, जैव-सुरक्षा, आधुनिक आवास व्यवस्था, हैचरी प्रबंधन, उत्पादन लागत में कमी तथा प्रभावी विपणन व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। तकनीकी सत्रों में पोल्ट्री उद्योग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने आधुनिक पोल्ट्री फार्मिंग, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, गुणवत्ता नियंत्रण, रोग नियंत्रण एवं जैव-सुरक्षा के साथ-साथ उद्योग के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। प्रतिभागियों को पोल्ट्री क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीनतम तकनीकों एवं भविष्य में होने वाले संभावित बदलावों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पोल्ट्री उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यहां बढ़ती जनसंख्या, पोषण की आवश्यकता, बाजार की उपलब्धता और युवाओं की उद्यमशीलता को देखते हुए पोल्ट्री क्षेत्र रोजगार और आर्थिक विकास का एक मजबूत माध्यम बन सकता है। इसके लिए किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, पशुचिकित्सकों, विभागीय अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

महिला एवं युवा उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

कॉन्क्लेव के दौरान किसानों एवं पोल्ट्री उद्यमियों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि पोल्ट्री पालन को वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण से अपनाने के साथ-साथ प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और समय-समय पर विशेषज्ञ सलाह की व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। छोटे एवं मध्यम स्तर के पोल्ट्री पालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने पोल्ट्री उद्योग में बायो-सिक्योरिटी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि रोगों की रोकथाम के लिए फार्म स्तर पर साफ-सफाई, नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था, उचित टीकाकरण, रोग निगरानी एवं वैज्ञानिक प्रबंधन को प्राथमिकता देनी होगी। स्वस्थ एवं सुरक्षित पोल्ट्री उत्पादन न केवल उत्पादकों के लिए लाभकारी है बल्कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए भी आवश्यक है। कॉन्क्लेव में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि पोल्ट्री क्षेत्र महिला एवं युवा उद्यमियों की भागीदारी को बढ़ाया जाए। कॉन्क्लेव का शुभारंभ आयुक्त अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ ओ पी आर्य द्वारा मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डा0 कपिलेश वार्ष्णेय एवं डा0 वर्षा सिंह द्वारा किया गया।

JNS News 24

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