अलीगढ़

सहकारिता से मजबूत होगा गांवों का विकास, हर पंचायत में बनेंगी नई समितियां

डीएम ने बढ़ाई सहकारिता आंदोलन की रफ्तार, पैक्स और डेयरी समितियों के विस्तार पर जोर

अलीगढ़ : जिले में सहकारिता आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना पर जोर दिया है। जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता में कलैक्ट्रेट सभागार में आयोजित डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कमेटी की बैठक में सहकारिता के विस्तार, समितियों के सुदृढ़ीकरण एवं तकनीकी आधुनिकीकरण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।जिलाधिकारी ने कहा कि केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप सहकारिता मॉडल को ग्रामीण विकास, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं गांव को बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी अथवा मत्स्य पालन सहकारी समितियों से आच्छादित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके और गांव स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।बैठक में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता नागेंद्र पाल सिंह ने अवगत कराया कि जिले में वर्तमान में 117 सहकारी समितियां संचालित हैं। इनमें 71 समितियों के कम्प्यूटराइजेशन का कार्य चरणबद्ध तरीके से कराया जा रहा है, जिसमें 70 समितियों में कार्य पूर्ण हो चुका है। जिलाधिकारी ने सभी समितियों के सचिवों एवं ऑडिट टीम से प्रमाण-पत्र प्राप्त कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब समितियों के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक लेनदेन पूर्ण रूप से कम्प्यूटर आधारित होंगे, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।डीएम ने कम्प्यूटर ऑपरेटरों एवं सचिवों के नियमित प्रशिक्षण पर बल देते हुए निर्देशित किया कि प्रतिदिन का कार्य उसी दिन ऑनलाइन अपडेट किया जाए। मण्डनपुर, विस्तौली, गिड़ौरा एवं गोंडा समितियों में ऑनलाइन फीडिंग कार्य लंबित पाए जाने पर उन्होंने जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार ने भी लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।बैठक में नवीन समितियों के गठन की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में 27 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जिनमें से सात समितियों ने व्यवसायिक गतिविधियां भी प्रारंभ कर दी हैं। डेयरी क्षेत्र में 36 नई समितियों का गठन किया गया है, जबकि 178 पुरानी समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। विभिन्न समितियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1700 लीटर दुग्ध संग्रहण किया जा रहा है। अधिकारियों ने इसे ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।जिलाधिकारी ने नवगठित बी-पैक्स समितियों के उन्नयन के लिए प्रत्येक समिति को दो लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के प्रस्ताव शीघ्र अनुमोदन के लिए भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का समन्वय कर पैक्स, डेयरी एवं मत्स्य समितियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। साथ ही पंचायत एवं ग्राम स्तर पर समितियों को आधारभूत ढांचा, भूमि एवं आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।बैठक में जिला कृषि अधिकारी द्वारा उर्वरक वितरण में शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए गए। वहीं मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि सहकारी समितियां बैंकिंग सुविधाओं के लिए प्राथमिकता से सहकारी बैंकों से जुड़ें, ताकि सहकारिता तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा सके।बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी सीवीओ डॉ0 दिवाकर त्रिपाठी, जिला कृषि अधिकारी डॉ धीरेंद्र कुमार, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी संजीदा बेगम, सहायक आयुक्त उद्योग ब्रजेश यादव, डीडीएम नाबार्ड नितिन कुमार एवं डीसीडीसी के सदस्य उपस्थित रहे।

JNS News 24

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