मंडल में पानी बचाने को नया प्लान, सहेजेंगे पानी की हर बूंद
मंडलायुक्त ओपी आर्य ने दिए निर्देश - नलकूपों की निगरानी, सोलर, जल संरक्षण और वाटर रिचार्ज से सुधरेगी व्यवस्था

अलीगढ़ : किसानों को निर्बाध सिंचाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने को लेकर अलीगढ़ मंडल में ठोस पहल शुरू हुई है। आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ ओ0पी0 आर्य ने शिविर कार्यालय पर गुरूवार को सिंचाई, नलकूप और भूगर्भ जल विभाग की समीक्षा में जल संचयन और भूगर्भ जल रिचार्ज को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।मंडलायुक्त ने भूगर्भ जल सुधारने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी तालाबों के साथ-साथ निजी तालाब बनाने के लिए लोगों को जागरूक करने के निर्देश देते हुए कहा कि स्कूल-कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर पानी की बूंद-बूंद को बचाने के लिए बच्चों और अभिभावकों को संकल्प दिलाया जाए, हमारा यह छोटा सा प्रयास आने वाले समय के लिए जल के सदुपयोग में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यदि हमने आज जल का संचयन न किया तो आने वाली पीढ़ियां हमको माफ नहीं कर पाएंगीं। जल का आवश्यकता के अनुरूप ही दोहन करें।भूगर्भ जल विभाग के हाइड्रोलॉजिस्ट आशीष चौधरी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 80 फीसदी जल रिचार्ज हो रहा है। अलीगढ़ में जलस्तर करीब 12 मीटर नीचे है और पांच साल में 2.5 मीटर गिरावट आई है। इगलास ब्लॉक क्रिटिकल घोषित है। इसके अलावा नगर निगम क्षेत्र भी क्रिटिकल क्षेत्र में आता है उन्होंने बताया कि खैर और गभाना के कॉलेजों में रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग का प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर आयुक्त ने कमिश्नरी कार्यालय में भी यही सिस्टम लगाने के निर्देश देते हुए इगलास और नगर निगम क्षेत्र के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने को कहाकमिश्नर ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों को जिलों में नए तालाब खोदने और पुराने तालाबों के जीर्णाेद्धार के निर्देश देते हए कहा कि राजकीय नलकूपों की नियमित निगरानी और रखरखाव इस तरह हो कि किसानों को बार-बार शिकायत न करनी पड़े। शासन की योजनाओं का लाभ सीधे खेत तक पहुंचना चाहिए।अधीक्षण अभियंता सिंचाई प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग की 314 टेल करीब 1700 किमी में फैली हैं, जिनसे 03 लाख 27 हजार हेक्टेयर खेतों को पानी मिल रहा है। आयुक्त ने कहा कि जल संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। जरूरत के हिसाब से पानी का उपयोग और वर्षा जल का अधिकतम संचयन ही स्थायी समाधान है।अधिशासी अभियंता नलकूप राजेन्द्र कुमार ने बताया कि मंडल में 1,678 राजकीय नलकूप हैं, जिनमें से 54 तकनीकी एवं विद्युत खराबी से बंद हैं। विगत तीन वर्ष में चार केंद्रीय कार्यशालाओं के आधुनिकीकरण से नलकूपों की बंदी में कमी आई है। चारों खंडीय कार्यालयों में सोलर पैनल लगने से बिजली बिल में 30 फीसदी की बचत हुई है। मंडल में 291 नलकूपों को आदर्श नलकूप बनाया गया है, जबकि 12 नलकूपों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत आईओटी सिस्टम से निगरानी शुरू हुई है। 85 नलकूपों की 5.354 हेक्टेयर जमीन पर पौधारोपण कराया जा रहा है। कबाड़ और जले तांबे के तारों की नीलामी से तीन साल में 150 लाख रुपये का राजस्व भी मिला है। मण्डलायुक्त ने सुचारू सिंचाई व्यवस्था के लिए बंद पड़े सभी नलकूपों को जल्द चालू करने के निर्देश दिए।बैठक में संयुक्त विकास आयुक्त मंशाराम यादव, अधिशासी अभियंता सिंचाई राजेन्द्र कुमार समेत अन्य संबंधित अधिकारीगणउपस्थित रहे।



