गांव में ही मिलेंगी राजस्व सेवाएं, 1 जुलाई से ग्राम सचिवालय में बैठेंगे लेखपाल
डीएम अविनाश कुमार के निर्देश पर रोस्टर होगा जारी

अलीगढ़ : जिले के ग्रामीणों को राजस्व विभाग की सेवाएं अब और अधिक सरल, सुलभ एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध होंगी। जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने आयुक्त एवं सचिव, उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में जिले के सभी ग्राम सचिवालयों में लेखपालों के नियमित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने और उनकी उपस्थिति का रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था जल्द ही प्रभावी होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि ग्राम सचिवालय ग्रामीण प्रशासन की आधारशिला हैं। यहां पंचायत सहायकों के माध्यम से संचालित ऑनलाइन सेवाओं के साथ-साथ अब राजस्व विभाग की सेवाएं भी अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध होंगी। आय, जाति, निवास, हैसियत प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल सहित विभिन्न ऑनलाइन राजस्व सेवाओं में लेखपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्राम सचिवालय में उनकी नियमित उपलब्धता से ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।डीएम ने बताया कि लेखपाल प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था की प्रथम कड़ी हैं। वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, रियल टाइम खतौनी, भू-अभिलेख सत्यापन, भू-नक्शा मिलान, कृषि एवं आवासीय पट्टा, फसल बीमा, दैवीय आपदा सहायता, निर्वाचन, धारा-34 एवं धारा-67 से संबंधित जांच, अवैध कब्जों की रिपोर्ट, राशन वितरण सत्यापन, खनन, पेंशन सत्यापन तथा अन्य अनेक महत्वपूर्ण कार्य लेखपालों के माध्यम से संपादित किए जाते हैं। ग्राम सचिवालय में नियमित रूप से बैठने की व्यवस्था होने से इन सभी कार्यों का निस्तारण अधिक पारदर्शी, त्वरित एवं जनहितकारी होगा।उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक ग्राम सचिवालय के लिए लेखपालों का साप्ताहिक रोस्टर तैयार कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को पूर्व निर्धारित दिवस एवं समय की जानकारी उपलब्ध हो सके और वे सीधे ग्राम सचिवालय पहुंचकर अपने राजस्व संबंधी कार्यों का निस्तारण करा सकें। शासन की मंशा के अनुरूप ग्राम सचिवालयों को ग्रामीण जनसेवा का सशक्त केंद्र बनाया जा रहा है। पंचायत एवं राजस्व विभाग के बेहतर समन्वय से गांवों में ही अधिकाधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह व्यवस्था मील का पत्थर साबित होगी। इससे ग्रामीणों का समय और धन दोनों की बचत होगी, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।



