अलीगढ़

बच्चों में मधुमेह जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित

उत्तर प्रदेश के 17 जिलों, जिनमें अलीगढ़ भी शामिल है

अलीगढ़  बच्चों में मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ाने एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आदत विकसित करने के उद्देश्य से वाईआरजी मेडिकल एजुकेशनल एंड रिसर्च फाउंडेशन द्वारा सनोफी के सहयोग एवं बेसिक शिक्षा विभाग के समन्वय से संचालित श्किडज़ कार्यक्रमश् के अंतर्गत नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज में सरकारी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के तहत उत्तर प्रदेश के 17 जिलों, जिनमें अलीगढ़ भी शामिल है, में व्यापक जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के 51 शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक और नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने कहा कि विद्यालय बच्चों में स्वस्थ आदतों के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और शिक्षक न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने विद्यालयों में स्वास्थ्य-अनुकूल वातावरण विकसित करने और मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता पर बल दिया।प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि किडज़ कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों एवं समुदाय के बीच मधुमेह के प्रति सही जानकारी उपलब्ध कराना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम विशेष रूप से ऐसा सहायक एवं संवेदनशील विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर केंद्रित है, जहाँ मधुमेह से प्रभावित बच्चों को आवश्यक सहयोग एवं प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम के अंतर्गत कॉमिक बुक, स्वास्थ्य मार्गदर्शिका, गतिविधि आधारित शिक्षण सामग्री तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए श्क्या करें और क्या न करेंश् जैसी उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिससे सीखने की प्रक्रिया रोचक और व्यवहारिक बनती है।वरिष्ठ डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. दीपक वार्ष्णेय ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए मधुमेह के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, समय पर जांच, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधियों और बचाव के प्रभावी उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली की आदतें प्रारंभिक अवस्था से ही विकसित की जाएं तो भविष्य में मधुमेह सहित अनेक गैर-संचारी रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रशिक्षण के उपरांत आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में शिक्षकों ने विद्यालयों में स्वास्थ्य शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने, विद्यार्थियों में संतुलित खानपान एवं नियमित व्यायाम के प्रति रुचि विकसित करने तथा स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने के व्यावहारिक उपायों पर विशेषज्ञों से विस्तार से चर्चा की।

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JNS News 24

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