जातिगत आरक्षण व्यवस्था में सुधार एवं समान अवसर की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
नागरिक को समानता, न्याय एवं समान अवसर प्राप्त होना चाहिए।

अलीगढ़। जातिगत आरक्षण व्यवस्था में सुधार, समान अवसर सुनिश्चित करने तथा यूजीसी एक्ट 2026 को वापस लेने की मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया।ज्ञापन में कहा गया कि भारत एक लोकतांत्रिक एवं संविधान आधारित राष्ट्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को समानता, न्याय एवं समान अवसर प्राप्त होना चाहिए। ज्ञापन देने वालों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी जाति, समुदाय अथवा वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद व्यक्ति तक अवसर पहुंचाना, समानता सुनिश्चित करना तथा शिक्षा एवं रोजगार में योग्यता और दक्षता को उचित महत्व देना है।ज्ञापन में मांग की गई कि आरक्षण एवं विशेष अवसरों का लाभ वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए आर्थिक स्थिति को प्रमुख आधार बनाया जाए।
साथ ही केवल जातिगत पहचान के आधार पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी आरक्षण का लाभ मिलने की व्यवस्था की समीक्षा कर जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता देने की मांग की गई।ज्ञापन में सभी आरक्षित वर्गों में क्रीमी लेयर लागू करने, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को भी शामिल किया जाए, तथा एक परिवार को आरक्षण का लाभ सीमित रूप से केवल एक बार देने की व्यवस्था पर विचार करने की मांग रखी गई।कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, करनी सेना, ब्राह्मण महासभा तथा तिलक तराजू तलवार मंच सहित विभिन्न संगठनों से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
तिलक तराजू तलवार मंच कार्यक्रम संयोजकों ने कहा कि समानता एवं सामाजिक न्याय के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आरक्षण व्यवस्था तथा उच्च शिक्षा से संबंधित नीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। साथ ही ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी एक्ट 2026 को वापस लेने की मांग भी रखी गई।



