सोमनाथ में ‘अनाहत’ की कथक प्रस्तुति से अंशिका अग्रवाल ने मोहा दर्शकों का मन
अंशिका अग्रवाल ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कथक प्रस्तुतियाँ दी

सोमनाथ। श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित ‘वंदे सोमनाथ – कला महोत्सव’ में जयपुर घराने की प्रसिद्ध कथक कलाकार अंशिका अग्रवाल ने अपनी सह-नृत्यांगनाओं नयनिका और नंदिनी के साथ अपने समूह की विशेष कथक प्रस्तुति अनाहत’ प्रस्तुत की। यह भव्य कला महोत्सव श्री सोमनाथ ट्रस्ट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) तथा गुजरात पर्यटन विभाग के संयुक्त आयोजन में आयोजित किया गया। श्रावण के प्रथम सोमवार, 3 अगस्त को सोमनाथ की पावन धरती पर अंशिका अग्रवाल एवं उनके समूह ने ‘अनाहत’ के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य और आध्यात्मिक भावों का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।अंशिका अग्रवाल *जयपुर घराने की विशिष्ट कथक कलाकार हैं, जो अपनी उत्कृष्ट तकनीक, लयकारी, ऊर्जा और तीव्र गतियों के लिए प्रसिद्ध हैं। वे *पंडित राजेंद्र गंगानी जी एवं पंडित हरीश गंगानी जी की शिष्या हैं। उन्होंने मात्र छह वर्ष की आयु में कथक का प्रशिक्षण प्रारंभ किया और कथक नृत्य में डबल मास्टर्स* की उपाधि प्राप्त की है। वे दूरदर्शन की ग्रेडेड कलाकार* हैं तथा *SPIC MACAY* से भी जुड़ी हुई हैं, जिसके अंतर्गत उन्होंने देशभर में अनेक कार्यशालाएँ एवं व्याख्यान-प्रदर्शन किए हैं।अंशिका पिछले पाँच वर्षों से *रामायण में माता सीता की भूमिका का सशक्त अभिनय भी कर रही हैं। वर्तमान में वे मुंबई में रहकर फिल्म एवं मनोरंजन जगत में *परफॉर्मर और कोरियोग्राफर के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने प्रसिद्ध कोरियोग्राफर गणेश आचार्य तथा दिग्गज अभिनेत्री *रेखा जी* के साथ भी विभिन्न परियोजनाओं में कार्य किया है।अंशिका अग्रवाल ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कथक प्रस्तुतियाँ दी हैं। उनकी प्रमुख प्रस्तुतियों में बूगी वूगी, ताज महोत्सव, कथक महोत्सव, नृत्य कला महोत्सव, नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA), मुंबई, किंगडम ऑफ ड्रीम्स, देहरादून में आयोजित साइंटिस्ट मीट तथा **थाईलैंड, सऊदी अरब, फुकेट और रियाद* जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।वंदे सोमनाथ – कला महोत्सव’ के माध्यम से अंशिका अग्रवाल और उनके समूह ने श्रावण के इस पावन अवसर पर कथक की शास्त्रीय परंपरा को भगवान सोमनाथ की पवित्र भूमि पर समर्पित किया। अनाहत’ की प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और शास्त्रीय नृत्य की सुंदर अभिव्यक्ति को दर्शकों तक पहुँचाया।



